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October 14, 2026
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पीएम योजना में 'भ्रष्ट तंत्र' का फर्जीवाड़ा: अपात्रों की जेब में पहुंचा पैसा, प्रशासन पर सवाल ?
उत्तर प्रदेश

पीएम योजना में ‘भ्रष्ट तंत्र’ का फर्जीवाड़ा: अपात्रों की जेब में पहुंचा पैसा, प्रशासन पर सवाल ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना का सपना था छोटे और सीमांत किसानों की आर्थिक मदद, लेकिन यहां जिले में यह सपना अब “भ्रष्टाचार और लापरवाही का खेत” बन चुका है। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार 24,447 किसान ऐसे हैं जिन्होंने अब तक केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री नहीं कराई, जिसके चलते उनकी 22वीं किस्त रोक दी गई है।

पीएम योजना में 'भ्रष्ट तंत्र' का फर्जीवाड़ा: अपात्रों की जेब में पहुंचा पैसा, प्रशासन पर सवाल ?

जिले में कुल 2,51,322 किसान इस योजना के लाभार्थी हैं, लेकिन चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें से हज़ारों ऐसे हैं ‘जो वास्तव में पात्र’ नहीं हैं। कृषि विभाग का कहना है कि “जो किसान केवाईसी नहीं करा रहे, वे या तो आय करदाता हैं या उनके नाम पर बड़ी संपत्ति दर्ज है।” यानी सरकारी योजना का पैसा उन लोगों तक पहुंच गया जिनके पास पहले से ही सबकुछ है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर यह योजना राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक लापरवाही की शिकार हो गई है।

पीएम योजना में 'भ्रष्ट तंत्र' का फर्जीवाड़ा: अपात्रों की जेब में पहुंचा पैसा, प्रशासन पर सवाल ?

जांच में अब तक 20,000 से अधिक अपात्र किसानों का नाम सामने आया है, जिनसे 3.17 लाख रुपये की वसूली की जा चुकी है, लेकिन विचारणीय यह है कि जब फर्जी किसान इतने वर्षों तक किस्तें लेते रहे, तो जिम्मेदार अफसर सोते रहे क्या? गांवों में लेखपालों और कृषि विभाग के फील्ड स्टाफ की मिलीभगत के बिना यह फर्जीवाड़ा संभव नहीं था ! किसानों की सूची में ऐसे नाम जुड़ गए जिनके पास ट्रैक्टर, दुकानों, मकानों और व्यावसायिक संपत्तियों की भरमार है।

पीएम योजना में 'भ्रष्ट तंत्र' का फर्जीवाड़ा: अपात्रों की जेब में पहुंचा पैसा, प्रशासन पर सवाल ?

उप निदेशक कृषि विभाग ने कहा कि ‘अब बिना केवाईसी और फार्मर रजिस्ट्री’ के किसी किसान को योजना का लाभ नहीं दिया जाएगा। पर असल में गांवों के किसानों का गुस्सा अलग ही कहानी कहता है। कई किसानों का कहना है कि बैंक वेरिफिकेशन और ई-केवाईसी प्रक्रिया इतनी जटिल है कि वे महीनों से इधर-उधर चक्कर काट रहे हैं। जिनके खाते फ्रीज़ हुए या लिंकिंग में गड़बड़ी हुई, वे आज भी अगली किस्त का इंतज़ार कर रहे हैं।

किसानों के लिए अनिवार्य हुई फार्मर रजिस्ट्री: इसी से मिलेगी सम्मान निधि

सूत्रों के मुताबिक विभाग के कुछ कर्मचारियों ने अपात्र लोगों से “किस्त जारी कराने के नाम पर कमीशन” भी लिया था। कई अपात्र किसानों ने जानबूझकर अपनी जमीन के कागज़ में बदलाव नहीं कराया, ताकि वे योजना के दायरे में बने रहें। कृषि विभाग के अंदरूनी सूत्र बताते हैं कि कई मामले ऐसे हैं जहां पति-पत्नी दोनों ही योजना का लाभ ले रहे थे। लेकिन किसी पर कार्रवाई नहीं हुई।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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