
- शरद मिश्रा
बांदा। रानी दुर्गावती मेडिकल कालेज के ‘ईएनटी डाक्टर शंकर कबीर’ की सलाह नहीं मानी तो अपने पर ही होगा ‘अत्याचार’। यानी ‘सावधानी हटी समझिये दुर्घटना घटी’।

डाक्टर शंकर कबीर की सलाह है की ‘दीपावली’ पर ‘आतिशबाजी’ करें मगर तेज धमाके के पटाखे नहीं चलाएं। तेज धमाके की आवाज से ‘कान के पर्दे’ को नुकसान हो सकता है। 120 डेसीमल से ज्यादा आवाज होने पर सुनने की ‘शक्ति प्रभावित’ हो सकती है।

रानी दुर्गावती मेडिकल कॉलेज के नाक-कान-गला रोग विशेषज्ञ डाक्टर शंकर कबीर ने बताया कि दीपावली पर युवाओं में तेज धमाके के पटाखे (बम) चलाने की होड़ रहती है, जो घातक हो सकती है। कान में अंदरूनी हिस्से में तेज आवाज की तरंगों से चोट लगती है। इससे सुनने की हड्डी (मैलियस, इनकस और स्टपीज) को नुकसान होता है।

धमाका होते ही सुनने की कोशिकाएं कुछ समय के लिए काम करना बंद कर देती हैं। यदि धमाका 120 डेसीमल से ज्यादा है तो स्थायी रूप से कोशिकाएं खराब हो सकती हैं। डाक्टर शंकर कबीर नें बताया कि खुले मैदान में बम चलाने से उसके धमाके की आवाज कान पर कम असर करती है, क्योंकि उसकी तरंगें चारों तरफ फैल जाती हैं। देखा जाता है कि युवा गलियों और छतों पर पटाखे चलाते हैं, वह घातक हो सकता है।
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