- विनोद मिश्रा
बांदा । जिले के चेकडैम प्यासे हैं।खेतो की प्यास नहीं बुझा पाते। गावों में खेतों के बीच बने ज्यादातर चेकडैम सूखे पड़े हैं, जबकि इनका निर्माण इसी मकसद से कराया गया है कि बारिश की ज्यादा से ज्यादा बूंदों को खेतों के बीच में ही सहेज कर रखा जाए ताकि इनसे पानी बचे व धरती की कोख का नीर भी बचा रहे। लेकिन मौजूदा समय ज्यादातर स्थानों में हालात कुछ अलग ही हैं। कई चेकडैम सूखे पड़े हैं जहां पानी की जगह धूल उड़ रही है।

बुंदेलखंड में सूखे के संकट को देखते हुए जल संरक्षण के लिए चेकडैम बेहद कारगार माने जा रहे हैं। सिचाई, कृषि व वन विभाग द्वारा इनका निर्माण अलग-अलग क्षेत्रों में कराया गया है। ज्यादातर चेकडैम फतेहगंज, नरैनी, बदौसा, बबेरू, बिसंडा, जसपुरा, मटौंध क्षेत्रों में बनाए गए हैं। वित्तीय वर्ष 2020-21 लघु सिचाई विभाग को 30 चेकडैम बनाने का लक्ष्य मिला। जिनमें शत प्रतिशत कार्य पूर्ण होने का दावा किया जा रहा है। चेकडैम बारिश के पानी को रोकने में बेहद कारगर हैं। इसी उद्देश्य से इनका निर्माण कराया गया है लेकिन ज्यादातर चेकडैम सूख गए हैं मई जून के दिनों में तो इनमें पानी तो दूर बल्कि धूल उड़ती नजर आती है।
जिले में मौजूदा वित्तीय वर्ष के लिए 30 चेकडैम निर्माण का लक्ष्य मिला है। इसके लिए 544.46 लाख की धनराशि मंजूर हुई।

विभागीय जानकारी के मुताबिक फरवरी में इसी साल यह धनराशि प्राप्त हुई थी। जिसमें पिछले महीने तक तीन करोड़ से अधिक की धनराशि व्यय हो चुकी थी। करीब 56 फीसद वित्तीय प्रगति पूरी होने का दावा किया गया। छह सौ हेक्टेअर क्षेत्रफल की होगी सिचाई वित्तीय वर्ष में बनाए गए चेकडैम से छह सौ हेक्टेअर क्षेत्रफल की सिचाई होगी। विभागीय मानक के अनुसार एक चेकडैम की औसत सिंचाई क्षमता 20 हेक्टेअर की होती है। चालू वित्तीय वर्ष में 30 नए चेकडैम जिले को मिले इस लिहाज से लगभग छह सौ हेक्टेअर की भूमि की सिचाई हो सकेगी। हालांकि अभी ज्यादातर चेकडैम सूखे ही पड़े हैं।क्योकि घर का पानी घर में, खेत का पानी खेत में व जमीन का पानी जमीन में रहे इसके लिए वर्षा जल की एक-एक बूंद को सहेजना होगा। तभी पानी बचेगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )




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