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October 12, 2026
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"साथी यूपी" भाजपा का कर रही विरोध ! करोड़ों का फर्जीवाड़ा ! क्यों सोया है खुफिया विभाग ?
उत्तर प्रदेश

“साथी यूपी” भाजपा का कर रही विरोध ! करोड़ों का फर्जीवाड़ा ! क्यों सोया है खुफिया विभाग ?

  • विनोद मिश्रा

बांदा। स्वयं सेवी संस्था “साथी यूपी” अपने “उदेश्यों को ठोकर मार क्या इंडिया गठबंधन से डील कर कार्य कर रही है” ? यह आशंका इन दिनों प्रदेश में चर्चा का विषय है। इसको मिलने वाली “करोड़ों की फंडिंग केंद्र और प्रदेश की भाजपा सरकार की जड़ों में” मठ्ठा डालने का कुत्सित प्रयास कर रही है ? जिसके भयंकर राजनीतिक परिणाम चुनावी हार के रूप में सामने भी आ चुके है!आश्चर्य तो इस बात का भी है की बांदा चित्रकूट में “साथी यूपी” संस्था नें “संविधान प्रचार के माध्यम से सरकार की चुनावी जड़ खोदता” रहा और यहां का “खुफिया तंत्र गहरी नींद” में सोया रहा।

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दरअसल संस्था यूपी का उद्देश्य उत्तर प्रदेश के अविकसित क्षेत्रों में विकास प्रक्रिया को गति देने के लिए काम करना है। जिसमें प्रत्येक ग्रामीण/नागरिक अपनी मानवीय क्षमता का एहसास करता है। भागीदारीपूर्ण, पारदर्शी और जवाबदेह स्थानीय स्वशासन प्रणाली के माध्यम से गांव के साथ-साथ राष्ट्र के विकास में योगदान देता है। इस संस्था की संकल्पना और स्थापना प्रसिद्ध गांधीवादी विचारक और सामाजिक कार्यकर्ता स्वर्गीय पारस भाई ने 1992 में की थी। जुलाई 2004 में सोसायटी पंजीकरण अधिनियम 21, 1860 के तहत इसे औपचारिक संगठन के रूप में पंजीकृत किया गया।

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“साथी” का कार्य छोटे और जमीनी स्तर के संभावित नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) को सक्षम बनाने, जमीनी स्तर पर काम करने वाले विकास पेशेवरों के दृष्टिकोण का निर्माण, समाज के वंचित वर्ग के बीच नेतृत्व निर्माण,था। जिसके माध्यम से समाज के हाशिए पर रहने वाले समुदायों के जीवन की गुणवत्ता और कल्याण में सुधार हो सके । लेकिन अब यह अपने “सिद्धांत से बेटरी” सी हो गई है ? यह “समाज की वेहतरी के लिये काम करने की बजाय राजनीतिज्ञों के हाथों की कठपुतली” बन गई है ?

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बताते हैं की अपनी स्थापना के बाद से ही यह “संगठन कुछ वर्षों बाद भटक” गया। जमीनी स्तर पर वास्तविक “मूलधारणा का कार्य समाप्त कर खाना पूरी करना एवं करोड़ों की फंडिंग को ठिकाने लगाने के फर्जीवाड़ा में महारथ” हासिल कर ली ?वर्तमान में स्थिति यह है की “साथी” पूर्वी उत्तर प्रदेश और बुंदेलखंड क्षेत्रों के 40 जिलों में अपने संवैधानिक उद्देश्यों के हस्तक्षेपों को लागू करनें में विफल है ? और “भाजपा सरकार की ऐसी -तैसी” कर रहा है? यह “सीबीआई जांच का विषय” बन गया है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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