- विनोद मिश्रा
बांदा। “हीरा की तमन्ना थी की,पन्ना में मुझे मिल जाये ” ।पर जो तमन्ना दिल में थीं, वह मियाद खत्म हो जानें से दिल में घुट कर रह गई। खनन की अनुमति की मियाद 31 दिसंबर तक होने के बाद एशिया की सबसे बड़ी बुंदेलखंड के पन्ना में स्थित खदान में हीरा खनन भी बंद कर दिया गया है। यहां पर पहली जनवरी से हीरों का खनन कार्य बंद हो गया है। यहां हीरों का खनन केंद्रीय इस्पात मंत्रालय की नेशनल मिनरल डेवलपमेंट कारपोरेशन लिमिटेड (एनएमडीसी) हीरा खनन करा रही थी।
मध्यप्रदेश के पन्ना टाइगर रिजर्व प्रबंधन ने हीरा खनन परियोजना महाप्रबंधक को नोटिस जारी कर खनन अवधि खत्म होने का हवाला देकर खनन कार्य बंद करा दिया है। बहुमूल्य रत्न हीरों की पन्ना खदान पूरी दुनिया में मशहूर है। यह बुंदेलखंड के पन्ना (मध्यप्रदेश) जिले के मझगवां में स्थित है। यह 1968 से चल रही है। अब तक इस खदान से 13 लाख कैरेट हीरे का उत्पादन किया जा चुका है।
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एनएमडीसी लिमिटेड कई दशकों से यहां हीरा खनन करा रही है। इसका कार्यालय भी इसी क्षेत्र में है। पन्ना टाइगर रिजर्व क्षेत्र संचालक उत्तम कुमार शर्मा ने बताया कि एनएमडीसी लिमिटेड के महाप्रबंधक को नोटिस जारी कर पहली जनवरी से परियोजना में उत्खनन कार्य पूरी तरह बंद करने के निर्देश दिए गए थे। इसी के अनुपालन में हीरा खदान व प्लांट को बंद कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि हीरा खनन व प्लांट की स्वीकृति 31 दिसंबर 2020 तक थी।

हीरा खनन परियोजना, मझगवां के मुख्य महाप्रबंधक एसके जैन ने बताया कि परियोजना के संचालन की स्वीकृति 31 दिसंबर 2020 तक थी। पन्ना टाइगर रिजर्व की नोटिस के बाद इसे पहली जनवरी से पूरी तरह रोक दिया गया है। आगे संचालन की अनुमति के लिए आवेदन पत्र राज्य वन प्राणि बोर्ड और वन पर्यावरण मंत्रालय में भेजे गए हैं।
उन्होंने बताया कि परियोजना के खनन पट्टे की लीज अवधि मध्य प्रदेश सरकार ने 30 जून 2040 तक बढ़ाने की अनुमति दे दी है, लेकिन कोरोना महामारी के चलते अन्य स्वीकृतियां मिलने में देरी हुई है। जैन ने जल्द ही स्वीकृति मिलने और हीरों का उत्पादन पुन: शुरू होने की उम्मीद जताई।

एनएमडीसी लिमिटेड की हीरा खदान पन्ना टाइगर रिजर्व के गंगऊ अभ्यारण्य क्षेत्र में है। यह वन भूमि है। इसका रकबा 74.018 हेक्टेयर है। यहां हीरा खदान संचालन 31 दिसंबर 2020 तक के लिए ही स्वीकृत था। पन्ना टाइगर रिजर्व राष्ट्रीय उद्यान है।
इसे 1981 में वन्य जीव अभ्यारण्य पार्क घोषित किया गया था। इसका कुल क्षेत्रफल 542.67 वर्ग किलोमीटर है। इस पार्क को भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने वर्ष 2007 में देश के सर्वश्रेष्ठ रखरखाव वाले राष्ट्रीय उद्यान का उत्कृष्टता पुरस्कार दिया था।
पन्ना की खदान में हीरा खनन बंद हो जाने से एनएमडीसी लिमिटेड के हैदराबाद स्थित मुख्यालय तक में हड़कंप है। अधिकारी खदान बहाली की कवायदों में जुट गए हैं। उधर, हीरा खनन पर रोक से बुंदेलखंड और खासकर पन्ना जिले के लोग निराश और नाराज हैं।

इसके लिए वह यहां के जनप्रतिनिधियों पर भी खफा हैं। उनका कहना है कि जनप्रतिनिधि केंद्र सरकार के पर्यावरण मंत्रालय से संचालन की बहाली करा सकते हैं, लेकिन वह अनदेखी कर रहे हैं। पन्ना जिला मुख्यालय से मात्र 20 किलोमीटर दूर मझगवां स्थित हीरा खनन परियोजना एशिया महाद्वीप की एक मात्र मैकेनाइज्ड परियोजना है। पर्यावरण हितैषी खनन के लिए यह अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी अलग पहचान बनाए हुए हैं। एनएमडीसी लिमिटेड खनन में नवीनतम यंत्रीकृत तकनीक का प्रयोग और उच्चतम सुरक्षा मापदंड अपनाते हुए हीरों का उत्पादन कराती है। इसकी उत्पादन क्षमता प्रति वर्ष एक लाख कैरेट हीरे हैं।

हीरा खदान से अभी 8.50 लाख कैरेट हीरे का उत्पादन और खनन होना शेष है। ऐसे में इस परियोजना को पुन: चालू करने की अनुमति नहीं मिली तो अरबों रुपये कीमत के बेशकीमती हीरों का खजाना जमीन में ही दफन रह जाएगा। यह देश की आर्थिक मजबूती के लिए भी नुकसानदेह होगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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