- विनोद मिश्रा
बांदा। “घोर आश्चयर्य की खबर जानिये”। यहां जिले में “न तो बाल भिखारी है और न ही वह गरीब जों सड़कों के किनारे झोपड़ -पट्टी डाल जीवन यापन” करते हैं।

इसकी खोज प्रोबेशन अधिकारी के निर्देशन में की गईं, “जो खाना -पूरी में सिमट गईं, न झुग्गी झोपडी वाले मिले और न भिखारी”। खोज अभियान की फोटो खिंचवा कर सूचना विभाग के माध्यम से मीडिया वालों को अपनी वाह -वाही की विज्ञप्तियां पहुंचवा दी गईं।

शुक्रवार को जिले के चिन्हित हॉट स्पॉट पर विभिन्न क्षेत्रों में सड़क पर जीवन यापन करने वाले बच्चों व बाल भिक्षावृत्ति उन्मूलन अभियान चलाया गया। अभियान में रेलवे स्टेशन एवम होटल आदि जगहों पर स्थित बाल भिक्षा वृत्ति में लिप्त बच्चों के चिन्हीकरण एवं पुनर्वास हेतु मुख्य हॉट चिन्हित की औपचारिकता निभाई गईं।

अभियान में सरंक्षण अधिकारी राजीव सिंह, किशोर पुलिस इकाई के अखिलेश प्रताप सिंह, महिला शक्ति केंद्र की जिला समन्वक, रेलवे सुरक्षा बोर्ड के अधिकारयो को “न तो खुदा ही मिले न मिसाले सनम”। जबकि हकीकत में बाल भिक्षावृति, बाल मजदूर, झुग्गी झोपड़ी वालों की जिले में भरमार हैं। जरूरत हैं “जिन खोजा तिन पाइयां, गहरे पानी पैठ” के तर्ज पर अभियान चलाने की।
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