
- विनोद मिश्रा
बांदा। “एसआईआर के प्यार में वोटर लिस्ट का क्या से क्या हो गया, यह बुंदेलखंड के पांच जिलों” में देखने को मिल रहा है। भारत निर्वाचन आयोग और राज्य निर्वाचन आयोग की “मतदाता सूचियों में करीब 10 लाख वोटरों का बड़ा फासला” सामने आया है, जिसने ‘पूरी प्रक्रिया पर ही सवाल खड़ा” कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा “विशेष गहन पुनरीक्षण” के बाद “बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा और जालौन में कुल 44 लाख 40 हजार 330 वोटर” बचे हैं।
इस दौरान 4 लाख 72 हजार 389 नाम काटे गए। सबसे ज्यादा जालौन में 1 लाख 65 हजार 561, बांदा में 1 लाख 19 हजार 634, चित्रकूट में 70 हजार 750, महोबा में 58 हजार 702 और हमीरपुर में 57 हजार 742 नाम हटाए गए। लेकिन राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा 10 जून 2026 को जारी पंचायत और नगरीय निकाय की सूचियों को जोड़ें तो आंकड़ा 54 लाख 36 हजार पहुंच जाता है। यानी दोनों आयोगों में 9 लाख 96 हजार का अंतर है, जो लगभग 22.4 फीसदी ज्यादा है।
सबसे “बड़ा अंतर” जालौन में है। यहां पंचायत-निकाय में 14 लाख 66 हजार 374 वोटर हैं, जबकि विधानसभा में 11 लाख 31 हजार 999 ही हैं,अंतर 3 लाख 34 हजार 375 का। बांदा में 14 लाख 66 हजार 631 के मुकाबले 12 लाख 29 हजार 887, अंतर 2 लाख 36 हजार 744 है। चित्रकूट में 8 लाख 38 हजार 370 के मुकाबले 6 लाख 68 हजार 198, हमीरपुर में 9 लाख 28 हजार 846 के मुकाबले 7 लाख 81 हजार 989 और महोबा में 7 लाख 36 हजार 335 के मुकाबले 6 लाख 28 हजार 257 वोटर हैं। चित्रकूट का “उदाहरण चौंकाता” है। 2024 में 7 लाख 34 हजार 948 मतदाता थे,एसआईआर में 1 लाख से ज्यादा नाम काटकर 6 लाख 68 हजार बचे, जबकि पंचायत सूची में 7 लाख 2 हजार 536 नाम हैं। सवाल है कि “वोटर मरे हैं, डुप्लीकेट हैं या फिर दो सूचियों में ही गड़बड़ी” है ?
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