
- विनोद मिश्रा
बांदा। इलाहाबाद-झांसी खंड स्नातक एमएलसी चुनाव ने साफ कर दिया है कि “अब सिर्फ पार्टी की लहर और बड़े नेताओं के चेहरे से चुनाव नहीं जीते” जाते। इस “सीट” पर समाजवादी पार्टी के जमीनी ‘वोटर बनाओ’ अभियान ने “भाजपा के लहर भरोसे चुनाव लड़ने की रणनीति को ध्वस्त” कर दिया है। भाजपा इस सीट को 24 साल तक अपनी “जागीर” मानती रही थी, पिछली बार “हार के बाद भी सबक” नहीं लिया।
इस बार भी हाईकमान ने नामांकन की अंतिम तारीख से कुछ दिन पहले ही “जालौन के अशोक कुमार राठौर को प्रत्याशी घोषित” कर औपचारिकता पूरी कर दी। प्रत्याशी और संगठन दोनों “मोदी-योगी लहर के भरोसे ही लहर” लेते रहे, जमीन पर वोटर बनाने के लिए कोई “गंभीर मिशन दसों जिलों में भाजपा द्वारा नहीं” चला। नतीजा, राठौर के गृह जिले जालौन में भी महज 20,999 वोटर ही बन सके। दूसरी तरफ सपा ने इस चुनाव को मिशन के तौर पर लिया।
सीट पहले से सपा के पास होने का “फायदा उठाते हुए पार्टी” ने एक साल पहले ही डॉ. मान सिंह यादव को “ग्रीन सिग्नल” दे दिया था। इसके बाद शुरू हुआ सपा का मेगा ‘वोटर बनाओ’ अभियान। डॉ. मान सिंह ने बांदा समेत सभी 10 जिलों के जिलाध्यक्षों, महानगर अध्यक्षों और बूथ स्तर के “कार्यकर्ताओं को टारगेट” दिया। घर-घर जाकर स्नातक मतदाताओं के फॉर्म भरवाए गए।
इसी “मेहनत का नतीजा” है कि उनके “गृह जनपद में 1.15 लाख वोटर बने, जो पूरे निर्वाचन क्षेत्र में सबसे ज्यादा” हैं। झांसी में भी 25,220 वोटर जोड़कर “सपा ने भाजपा को दूसरे पायदान पर धकेल” दिया। यह “जीत” बताती है कि “स्नातक जैसी पढ़े-लिखे वोटरों वाली सीट पर लहर नहीं, बल्कि संगठन का पसीना काम” करता है। “सपा का फॉर्मूला हिट रहा और भाजपा लहर के इंतजार में ही चुनाव हार” गई।
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