
- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले के ‘हथौड़ा स्थित जामिया अरबिया मदरसा के उलेमा बंधु की कथित कानून विरोधी कारगुजारियां’ एक बार फिर ‘आरोपों के घेरे में चर्चा के साथ ही जांच का विषय’ बन गई है। ‘पुलिस रिकॉर्ड और पूर्व की जांच एजेंसियों‘ की कार्रवाई बताती है कि ‘मदरसे की शाख पर चोट’ तो उसी के ‘प्रबंधक और उलेमा मौलाना हबीब व नजीब की कथित गतिविधियों’ से लगी है?
वर्ष 2018 में आतंकवाद रोधी दस्ते ने कश्मीर से जुड़े एक मामले में मदरसे में छापेमारी की थी। कई कश्मीरी छात्रों और शिक्षकों से पूछताछ हुई, कुछ छात्रों को हिरासत में भी लिया गया। इस कार्रवाई के बाद “मदरसा देश भर की सुर्खियों” में आ गया और “संस्थान की छवि पर गंभीर सवाल उठे ? उत्तर प्रदेश सरकार के मदरसा सर्वेक्षण में जामिया अरबिया का नाम “कथित तौर” पर “बिना मान्यता संचालित” हो रहे “मदरसों की सूची” में सामने आया था।
करोना काल में जिले को संकट में डालने का भी जामिया अरबिया मदरसा के संचालकों का झूठ उनपर भारी पड़ा था ! मदरसे में दिल्ली मरकज़ से लौटे किसी छात्र के होने की जानकारी छिपाने वाले हथौरा मदरसा संचालक सहित समेत सात आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था ! इस खुलासे ने संस्थान की वैधता को कठघरे में खड़ा कर दिया। जो सरकारी रिकॉर्ड में दर्ज है।
आरोपों के मुताबिक मौलाना हबीब और नजीब पर आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के आरोप हैं? आरोपों की फेहरिस्त बहुत लंबी है ! महोबा के भटपुरा में मदरसे की जमीन की प्लाटिंग करने का “कथित आरोप” के अलावा नजीब पर मध्य प्रदेश के पन्ना जिले के अजयगढ़ में गलत पता दिखाकर जमीन खरीदने का आरोप ! खतौनी में दर्ज पता इसका प्रमाण है। इन मामलों को लेकर एफआईआर दर्ज होने और जांच करने की मांगें सामने रही है।
इसी क्रम में वर्ष 2013 में छात्रों के मल्टी मीडिया फोन सार्वजनिक रूप से जलाने की घटना ने भी मदरसे को विवादों में ला दिया था। बार-बार जांच एजेंसियों की रडार पर आने और प्रबंधकों पर लगे आरोपों के चलते जामिया अरबिया मदरसा की तालीमी पहचान पर लगातार सवाल उठ रहे हैं ? स्थानीय स्तर पर चर्चा है कि संस्थान की बदनामी की सबसे बड़ी वजह उसके अपने ही जिम्मेदारों की कथित कार्यशैली है। पुलिस अभिलेखों में दर्ज मामलों की जांच अभी भी चर्चा का विषय है। इस मामले को एक संप्रदाय विशेष के राजनीतिक दल एआईएमआईएम से जुड़े अधिवक्ता वाजिद अली औऱ उनसे जुड़े वकीलों नें पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन देकर “मामले को मोड़नें का कुत्सित प्रयास” किया इसके पीछे उनका क्या व्यक्तिगत हित है ? यह भी” गंभीर विचारणीय प्रश्न” है?
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