
- विनोद मिश्रा
बांदा। बांदा की राजनीति में इन दिनों “एक नई करवट” साफ दिखाई दे रही है। सदर विधायक प्रकाश द्विवेदी ने “सियासी शतरंज” पर ऐसा दांव चला कि “समर्थक उत्साहित” हैं और “विरोधी खेमे में असहज खामोशी पसरी” हुई है। विरोधी खेमे में हलचल मच गई। राजनीति के खेल में “नहला पर ट्रंप का इक्का” ठोंकते हुए विधायक प्रकाश द्विवेदी स्वयं को एक कुशल रणनीतिकार और धुरंधर खिलाड़ी के रूप में स्थापित करते नजर आए।

खुरहंड में उनके द्वारा आयोजित धार्मिक आयोजन के दौरान बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा विधायक प्रकाश द्विवेदी की आध्यात्मिक एवं सार्वजनिक जीवन से जुड़ी प्रशंसा ने राजनीतिक हलकों में गहरे संकेत दे दिए। कहा की इसी साल विधायक के आग्रह पर वह खुरहंड में एक सप्ताह हनुमान कथा सुनायेंगे। उनके वक्तव्यों से यह भावार्थ उभरकर सामने आया कि प्रकाश द्विवेदी केवल एक जनप्रतिनिधि नहीं,बल्कि बांदा की राजनीति में “नायक से महा नायक” की भूमिका में हैं।

कार्यक्रम के दौरान पंडित धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री द्वारा विधायक प्रकाश दिवेदी की आध्यात्मिक निष्ठा और जनसेवा भाव की सार्वजनिक प्रशंसा ने सियासी हलकों में नए समीकरणों को जन्म दे दिया। उनके कथनों से यह स्पष्ट संकेत उभरा कि जो जनप्रतिनिधि अध्यात्म को आत्मसात कर निष्छल भाव से सेवा करता है, वही जनता के बीच स्थायी स्थान बनाता है। प्रकाश के ऊपर हनुमत सरकार की कृपा है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह वक्तव्य केवल आध्यात्मिक नहीं था,बल्कि उसमें सामाजिक और राजनीतिक स्वीकार्यता का भी स्पष्ट संदेश निहित था। इसी कारण प्रकाश दिवेदी को बांदा की राजनीति में “नायक नहीं, महा नायक” के रूप में देखने की चर्चाएं तेज हो गईं।

बागेश्वर सरकार के संदेश का मूल भाव यही रहा कि भगवान उन्हीं की सुनते हैं जो मंदिरों में ही नहीं, बल्कि जनसेवा में भी ईश्वर को देखते हैं। जब जनप्रतिनिधि सेवा को साधना मान लेता है, तब जनता स्वयं उसके लिए जनार्दन बन जाती है। यह विचारधारा सीधे तौर पर विधायक प्रकाश दिवेदी की सार्वजनिक छवि से जुड़ती दिखाई दी, जो लंबे समय से धार्मिक आस्था और क्षेत्रीय सक्रियता के लिए जाने जाते हैं।

दूसरी ओर, भाजपा के भीतर विधायक प्रकाश द्विवेदी के इस कार्यक्रम से कथित विरोधियों के चेहरों पर असहजता साफ दिखाई दी। बांदा में आयोजित पांच दिवसीय हनुमंत कथा को लेकर जो राजनीतिक समीकरण साधने की कोशिशें की जा रही थीं, वे धीरे-धीरे स्वयं ही निस्तेज होकर विधायक प्रकाश की बढ़ती लोकप्रियता के “प्रकाश पुंज में समाहित” होती नजर आईं। राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा आम है कि जिस आयोजन को कुछ लोग राजनीतिक लाभ-हानि के तराजू में तौल रहे थे, वही आयोजन अंततः प्रकाश दिवेदी के लिए सशक्त जनसमर्थन का माध्यम बन गया।

विधायक प्रकाश द्विवेदी, जो पंडित धीरेंद्र शास्त्री के अनन्य भक्त और प्रशंसक माने जाते हैं, उन्हें अपने आवास पर आमंत्रित कर एक स्पष्ट राजनीतिक और सामाजिक संदेश दिया। इस आयोजन के बाद बांदा की राजनीति में छाई अनिश्चितता की बदली छंटती दिखाई दी और जनमानस में विधायक प्रकाश की छवि और अधिक प्रखर होकर उभरी। राजनीतिक जानकारों की मानें तो विधायक प्रकाश दिवेदी ने धर्म और राजनीति का “ट्वेंटी-ट्वेंटी मैच” खेलते हुए ऑलराउंडर प्रदर्शन किया है। उन्होंने न केवल धार्मिक भावनाओं को साधा,बल्कि संगठन के भीतर चल रहे अप्रत्यक्ष विरोध के हर दांव को भी प्रभावी ढंग से निष्प्रभावी कर दिया।
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