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October 13, 2026
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चित्रकूट मंडल में 50 साल बाद पिघली 'चकबंदी' की बर्फ: 380 गांवों को मिलेगा 'डिजिटल सहारा'
उत्तर प्रदेश

चित्रकूट मंडल में 50 साल बाद पिघली ‘चकबंदी’ की बर्फ: 380 गांवों को मिलेगा ‘डिजिटल सहारा’

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। चित्रकूट मंडल के किसानों के लिए यह फैसला किसी ऐतिहासिक राहत से कम नहीं है। दशकों से बिखरी जोतों, उलझे नक्शों और अधूरी चकबंदी की मार झेल रहे किसानों की उम्मीदों को अब नई दिशा मिलने जा रही है। प्रदेश सरकार ने चकबंदी की सबसे बड़ी तकनीकी बाधा फटे, गुमशुदा और जर्जर नक्शों को जड़ से खत्म करने का निर्णय लेते हुए सेटेलाइट और जीपीएस आधारित आधुनिक तकनीक से नए ई-नक्शे तैयार कराने का ऐलान किया है। इससे उन गांवों में भी चकबंदी संभव हो सकेगी, जहां बीते 50 वर्षों में एक बार भी यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई।

चित्रकूट मंडल में 50 साल बाद पिघली 'चकबंदी' की बर्फ: 380 गांवों को मिलेगा 'डिजिटल सहारा'

दरअसल, मंडल में चकबंदी की प्रक्रिया वर्ष 1954 से शुरू हुई थी, जिसका उद्देश्य किसानों की बिखरी हुई जोतों को एक चक में समेटकर खेती को सुगम बनाना था। लेकिन बीते पांच दशकों में तकनीकी खामियों, पुराने नक्शों के नष्ट हो जाने और रिकॉर्ड के अभाव के चलते चित्रकूटधाम मंडल के 2631 राजस्व गांवों में से 380 गांवों में आज तक एक बार भी चकबंदी नहीं हो सकी। इन गांवों के किसान वर्षों से शासन से किसी ठोस समाधान की उम्मीद लगाए बैठे थे।

चित्रकूट मंडल में 50 साल बाद पिघली 'चकबंदी' की बर्फ: 380 गांवों को मिलेगा 'डिजिटल सहारा'

अब सरकार ने इन अटकी हुई चकबंदियों को पूरा करने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लेने का फैसला किया है। चकबंदी विभाग के अनुसार, नए सिरे से तैयार होने वाले ई-नक्शों में यह स्पष्ट रूप से दर्ज होगा कि रिकॉर्ड में किस व्यक्ति के नाम कितनी जमीन है और मौके पर उसका वास्तविक कब्जा कितना है। इसके लिए जीपीएस आधारित उच्च तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे जमीन के एक-एक इंच का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार किया जा सकेगा।

चित्रकूट मंडल में 50 साल बाद पिघली 'चकबंदी' की बर्फ: 380 गांवों को मिलेगा 'डिजिटल सहारा'

अधिकारियों का दावा है कि नई प्रणाली लागू होने के बाद जमीन संबंधी विवादों में कमी आएगी और किसानों को अपनी जोतों का स्पष्ट और प्रमाणिक नक्शा मिलेगा। इससे न केवल खेती आसान होगी, बल्कि विकास कार्यों, सड़क निर्माण और सिंचाई योजनाओं में भी पारदर्शिता आएगी। आंकड़ों पर नजर डालें तो चित्रकूटधाम मंडल में जिन गांवों में अब तक चकबंदी नहीं हो सकी है, उनमें बांदा के 768 राजस्व गांवों में 121 गांव, महोबा के 632 में 77, हमीरपुर के 565 में 85 और चित्रकूट के 666 गांवों में 97 गांव शामिल हैं। इन सभी गांवों को अब चरणबद्ध तरीके से चकबंदी की मुख्यधारा में लाने की तैयारी है।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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