- विनोद मिश्रा
बांदा। बारिश की “महावट से किसानों का मन मयूर” है। दो दिन चली रिम -झिम बारिश नें किसानों के लिये “अमृत महोत्सव” सी बन गई। इससे फसलों से पाला का प्रकोप खत्म हो गया है और माहू भी धुल गई है। अगले कुछ दिन फसलों में पानी लगाने की भी जरूरत नहीं पड़ेगी। उधर, ठंड से भी लोगों ने राहत महसूस की है।

चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों में 9,40,526 हेक्टेयर में रबी की बुआई की गई है। यहां पानी की कमी के चलते ज्यादातर दलहन व तिलहन में चना, मटर, मसूर, लाही, सरसों, अलसी की बुआई है। गेहूं की बुआई महज 2.50 लाख हेक्टेयर में ही की गई है। नवंबर-दिसंबर में बारिश न होने से फसल मुरझा रही थी। फसलों में पाला मार रहा था।

माहू कीट ने भी दस्तक दे दी थी। ऐसे में बारिश फसलों के लिए रामबाण का काम किया है। किसानों की पाला की समस्या समाप्त हो गई। पौधों में लगी माहू भी धुल गई। बुधवार को आसमान में बादल छाए रहे। मौसम विभाग ने बारिश के आसार बताए हैं। कृषि विश्वविद्यालय के मौसम वैज्ञानिक दिनेश शाहा का कहना है कि दो दिन में 7.6 मिली मीटर बारिश हुई। हालांकि बारिश कम है, लेकिन हल्की बारिश फसलों के लिए बेहद लाभदायक है।

किसानों का मानना है कि ठंड में फसलों की बार-बार सिंचाई करनी पड़ रही थी। बारिश से अब पाला नहीं पड़ेगा और माहू भी धुल गई। बारिश से सरसों चने ने कन्ने फोड़ दिए हैं। गेहूं की उपज में फायदा होगा। अभी तक जिस तरह की बारिश हुई है। वह फसलों के लिए लाभदायक है। तेज बारिश दलहन व तिलहन के लिए बेहद नुकसानदायक होती है। गेहूं के लिए फायदा होगा। जिला कृषि अधिकारी डाक्टर प्रमोद नें कहा कि बारिश फसलों के लिए बेहद लाभदायक है। मंडल में फसलों में पाला मारने की समस्या कम है। लाही व अरहर में माहू लगने की समस्या थी, जो बारिश के बाद समाप्त हो जाएगी।




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