- विनोद मिश्रा
बांदा। केंद्र सरकार के पंचायती राज मंत्रालय द्वारा संचालित स्वामित्व योजना के अन्तर्गत वर्तमान में भारत सरकार द्वारा वर्ष 2020-21 में उत्तर प्रदेश में लगभग एक लाख गाॅवों को इस योजना में शामिल किया गया है और इस कार्य को दो वर्ष की अवधि में पूर्ण किया जाना है। ग्रामीण आबादी सर्वेक्षण स्वामित्व योजना के लिए जनपद में 602 ग्रामों को अधिसूचित किया गया है, जिनमें से चकबन्दी एवं गैर आबाद 78 गांवों को छोडकर 524 ग्रामों में आबादी सर्वेक्षण ड्रोन द्वारा कराया गया है, जिनमें से तहसील अतर्रा, बबेरू एवं सदर में ड्रोन फ्लाइंग का कार्य पूरा हो चुका है। भारतीय सर्वेक्षण विभाग उ.प्र. एवं राजस्व परिषद उ.प्र. लखनऊ द्वारा संयुक्त रूप से स्वामित्व योजना अन्तर्गत डिजिटल घरौनी (प्रापर्टी) कार्ड तैयार कराये गये हैं।

इस योजना के तहत तहसील सदर के पायलट प्रोजेक्ट अन्तर्गत 10 ग्रामों की घरौनी वितरण विगत वर्ष 11 अक्टूबर को प्रधानमंत्री द्वारा एवं इसी वर्ष 12 फरवरी को मुख्यमंत्री द्वारा 44 ग्रामों की घरौनियों का डिजिटल वितरण किया जा चुका है। इस प्रकार 54 ग्रामों की 16519 घरौनियां पूर्व में वितरित की जा चुकी हैं। उसी के क्रम में गुरुवार को जनपद मुख्यालय पर 459 ग्रामों की 130210 घरौनियों का वितरण तहसीलों एवं जिला मुख्यालय में जनप्रतिनिधियों एवं जिलाधिकारी अनुराग पटेल की अध्यक्षता में कलेक्ट्रेट सभागार में सम्पन्न हुआ। इस प्रकार 513 ग्रामों में 146769 घरौनियों का वितरण कराया गया है।

जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने ग्राम तिन्दवारा के स्वामित्व दादूराम, नन्द किशोर, निजामुद्दीन, मवई बुजुर्ग से प्रेम बाबू, खुदाबक्श, ग्राम लुकतरा से लल्लू, राजकुमार, ग्राम महोखर से हिमांशू, सूरजबली, पडुई से गोबिन्द, शिवकुमार, सूरजबली, पचनेही से पुरूषोत्तम, बैद्यनाथ, जमालपुर से राकेश सिंह, रमेश सिंह, सहित आदि किसानों को घरौनी का वितरण किया गया। जिलाधिकारी अनुराग पटेल ने कहा कि हमारे अत्यधिक लोकप्रिय, जनप्रिय प्रधानमंत्री द्वारा आज बनारस में हजारों, करोड़ों के विकास कार्यों का शिलान्यास किया गया। उसी के साथ-साथ डिजिटल घरौनियों का भी वितरण किया गया।

जिलाधिकारी ने यह भी कहा कि इस योजना से किसानों को बैंको से ऋण लेने और अन्य वित्तीय लाभ लेने के लिए अपनी सम्पत्ति को वित्तीय सम्पत्ति के रूप में उपयोग करने में सक्षम बनायेगा। इसे अलावा यह ग्राम पंचायतों की कर संग्रह एवं मांग मूल्याकंन प्रक्रिया को सुदृढ़ बनाने के लिए सम्पत्ति और परिसम्पत्ति रजिस्टर के अपडेशन को भी सक्षम करेगा।

इस प्रकार सम्पत्ति घारकों का कानूनी रिकार्ड और उनके आधार पर ग्रह स्वामियों को सम्पत्ति अभिलेख जारी करने से ऋण एवं अन्य वित्तीय सेवाओं की खरीद के लिए ग्रामीण आवासीय सम्पत्तियों का मौद्रीकीकरण सुविधाजनक बनेगा। बैठक में अपर जिलाधिकारी न्यायिक अमिताभ सहित किसान बन्धु उपस्थित रहे।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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