
- शरद मिश्रा
बांदा। जनपद में बालू खदानों से वसूली कर ‘जीवन यापन’ करने वाले कुछ “नेता टाइप” पत्रकारों ने अब स्वर्गीय सुरेश चंद्र गुप्ता मेमोरियल प्रेस क्लब बांदा पर ‘कब्जे की साजिश’ रच दी है। इन ‘बालूजीवी और उगाहीजीवी‘ तत्वों का मकसद ‘प्रेस क्लब’ के ‘सम्मानित नाम का इस्तेमाल’ कर ‘खदानों से मोटी वसूली की धार तेज’ करना है।
प्रेस क्लब के महामंत्री विनोद मिश्रा ने इस \अवैधानिक प्रयास और प्रशासन को गुमराह\ करने की ‘साजिश’ की ‘कड़ी आलोचना’ करते हुए साफ कहा है कि “किसी भी दलाल और उगाहीबाज को प्रेस क्लब की पवित्रता से खिलवाड़ नहीं करने देंगे।” विनोद मिश्रा ने बताया कि पिछले कई वर्षों से ‘बालू खदानों से जुड़े कुछ संगठित गिरोह, वैध पत्रकारिता की आड़ में वसूली अभियान’ चला रहे हैं। ये लोग ‘अपनी लिस्ट बनाकर खदान संचालकों’ को देते हैं और बदले में “मासिक बख्शीश” बांट लेते हैं।
इनमें “वो अखबार शामिल हैं जो कभी छपते ही नहीं, सिर्फ पीडीएफ” पर हैं। वो चैनल हैं जो टीवी पर नहीं मिलते और वो यूट्यूब चैनल हैं जिनका माइक 500 रुपये में लोगो सहित मिल जाता है। खदानें जून से बंद होने के कारण “भूखे” इन झुंडों ने अब “नया रास्ता” चुना है।
दीपावली के बाद ‘खदानें खुलने से पहले ये प्रेस क्लब के नाम का सहारा’ लेना चाहते हैं। इसी साजिश के तहत इनके ‘एक झुंड’ ने जिलाधिकारी को ‘ज्ञापन देकर झूठ’ बोला कि ‘प्रेस क्लब के भवन पर अराजक तत्वों ने कब्जा’ कर लिया है और ‘पत्रकारों के लिए नहीं खोला’ जा रहा।
महामंत्री विनोद मिश्रा ने ‘प्रशासन को सच्चाई से अवगत’ कराते हुए कहा कि बाबूलाल चौराहे स्थित पुराने कांजी हाउस में बना प्रेस क्लब भवन पूरी तरह सुरक्षित है। इस भवन को ‘वैध पत्रकार संगठनों और समाजसेवी संस्थाओं को बैठकों’ के लिए ‘निशुल्क’ दिया जाता है। ग्रामीण पत्रकार एसोसिएशन यहां नियमित बैठक करता है। भवन का अनुरक्षण भी हाल में कराया गया है। उन्होंने ‘चेतावनी’ दी कि “उगाही और दलाली के लिए ये कथित पत्रकार अपने-अपने संगठनों के दफ्तर का प्रयोग” करें।
स्वर्गीय सुरेश चंद्र गुप्ता मेमोरियल प्रेस क्लब के “नाम का दुरुपयोग कतई बर्दाश्त नहीं” होगा। अगर कोई प्रेस क्लब के नाम पर रुपये मांगे तो तुरंत पुलिस और प्रेस क्लब पदाधिकारियों को सूचना दें। महामंत्री विनोद मिश्रा ने याद दिलाया कि |कुछ वर्ष पहले भी ऐसे ही एक झुंड ने प्रशासन को गुमराह कर प्रेस क्लब में घुसने की कोशिश| की थी, लेकिन “जांच में वह खुद ब्लैकमेलर” निकला था। महामंत्री ने जिलाधिकारी से मांग की है कि इन बालूजीवी, उगाहीजीवी और ब्लैकमेलरों की गहन जांच कर “बांदा से इस गंदगी को साफ” किया जाए, ताकि “असली पत्रकारों की छवि धूमिल न” हो।
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