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October 14, 2026
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स्वास्थ्य सिस्टम आईसीयू में: डायरिया-बुखार से त्राहिमाम, अस्पताल बेहाल, मरीज बेहिसाब
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

स्वास्थ्य सिस्टम आईसीयू में: डायरिया-बुखार से त्राहिमाम, अस्पताल बेहाल, मरीज बेहिसाब

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले में गर्मी और गंदगी ने मिलकर एक जानलेवा गठबंधन बना लिया है, और इसकी सबसे बड़ी कीमत चुका रही है आम जनता। जिला अस्पताल इन दिनों बीमारियों के तांडव का केंद्र बन गया है, जहां डायरिया और बुखार पीड़ित मरीजों की संख्या बेकाबू हो चुकी है। हालत गंभीर होने पर उन्हें भर्ती करना पड़ रहा है, लेकिन बेड और संसाधनों की सीमा भी अब जवाब देने लगी है।

स्वास्थ्य सिस्टम आईसीयू में: डायरिया-बुखार से त्राहिमाम, अस्पताल बेहाल, मरीज बेहिसाबसीएमएस ने स्पष्ट किया है कि मरीजों की संख्या में भारी इज़ाफ़े के साथ आईबी फ्लूड (ड्रिप) और दवाओं की खपत भी कई गुना बढ़ गई है। वर्तमान में हर दिन अस्पताल में 4000 पैरासिटामोल और अन्य टैबलेट्स, 2000 डीएनएस, डी-5 और आरएल ड्रिप बोतलें, 2000 ओआरएस पाउच और 2000 सिरिंज का इस्तेमाल हो रहा है। जेएल राजपूत, जो फ्लूड स्टॉक की देखरेख कर रहे हैं, ने बताया कि फिलहाल स्टॉक पर्याप्त है, लेकिन अगर मरीजों का दबाव इसी तरह बढ़ता रहा तो आने वाले दिनों में चुनौती गहरी हो सकती है।

डायरिया का विस्फोट: अस्पतालों में अफरातफरी, मरीजों की भीड़ में ‘दम’ तोड़ती सरकारी व्यवस्था !ईएमओ डॉ. विनीत सचान ने बताया कि डायरिया से ग्रसित मरीजों को कम से कम दो दिन तक भर्ती कर इलाज देना अनिवार्य हो गया है। ड्रिप, इंजेक्शन और दवाओं के जरिए हालत में सुधार आने पर ही उन्हें छुट्टी दी जा रही है। बुखार के मरीज भी इसी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं भर्ती, ऑब्जर्वेशन, इलाज और फिर छुट्टी।

डायरिया का विस्फोट: अस्पतालों में अफरातफरी, मरीजों की भीड़ में ‘दम’ तोड़ती सरकारी व्यवस्था !डॉक्टरों के अनुसार, यह सिर्फ मौसमी संक्रमण नहीं, बल्कि जल और खाद्य जनित संक्रमण का व्यापक असर है, जो शहर के पेयजल व्यवस्था और स्वच्छता की स्थिति पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है। जब ओपीडी बंद होती है, तब भी मरीजों की पीड़ा नहीं रुकती। ट्रॉमा सेंटर की इमरजेंसी यूनिट में रात-दिन मरीजों की लाइन लगी रहती है।

स्वास्थ्य सिस्टम आईसीयू में: डायरिया-बुखार से त्राहिमाम, अस्पताल बेहाल, मरीज बेहिसाबपरिजन परेशान, मरीज बेहाल, डॉक्टर थके हुए और प्रशासन फिलहाल ‘निरीक्षण मोड’ में ही दिख रहा है। अब सवाल ये है कि क्या नगर पालिका, जलकल विभाग और स्वास्थ्य महकमा सिर्फ अस्पताल पर ही सारी ज़िम्मेदारी डाल देंगे? बांदा का स्वास्थ्य ढांचा इस वक्त संक्रमण की सुनामी के बीच जूझ रहा है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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