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October 14, 2026
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चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। जिला मुख्यालय का ‘न्यू वर्ल्ड वाटर पार्क’ अब ‘वाटर पार्क’ कम ‘वॉर्निंग पार्क’ ज्यादा लग रहा है? जांच के प्रति प्रशासन लापरवाह रहा तो उसे चिंताओं की ज्वाला देखनी पड़े तो कोई आश्चर्य नहीं होगा ! यहां नहाने वाले बच्चे-बड़े केमिकल वाले पानी से इस कदर झुलस रहे हैं कि पार्क का निकनेम ‘क्लोरीन का कुंड’ पड़ गया है। डर ये है कि ‘खुजली-जलन’ से शुरू हुआ मामला कहीं ‘जनाज़े’ तक न पहुंच जाए।

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?हाल ये है कि पार्क से निकलने वाला हर दूसरा शख्स शरीर पर लाल चकत्ते और जलन लेकर लौट रहा है। माँ-बाप कहते हैं बच्चे को नहलाने भेजा था, ‘हाफ फ्राई’ होकर लौटा है। डॉक्टरों के पर्चे पर ‘केमिकल रिएक्शन’ लिखा जा रहा है, पर प्रशासन की फाइल पर ‘सन्नाटा’ लिखा है।

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?सबसे बड़ा सवाल इतनी शिकायतों के बाद भी जांच की ‘स्टार्ट’ बटन कौन दबाएगा? पानी में क्लोरीन की मात्रा ‘नॉर्मल’ है या ‘नागासाकी’ लेवल की, ये बताने वाला कोई ‘लैब वाला बाबू’ अभी तक पार्क तक पहुंचा ही नहीं। लोग पूछ रहे हैं क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे की ‘वेटिंग लिस्ट’ में है? क्या चार कंधों पर कोई निकलेगा तभी फाइल खुलेगी?

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?जनचर्चा ये भी है कि ‘तेज’ कहे जाने वाले अफसरों की कलम इस पार्क के नाम पर ‘पावर सेविंग मोड’ में चली जाती है। न नोटिस, न सैंपल, न ताला। सिर्फ ‘खामोशी की चूड़ी’ खनक रही है। जबकि नियम कहता है कि पब्लिक प्लेस पर खतरा दिखे तो ‘तुरंत एक्शन’ वरना ‘बाद में रिएक्शन’ बहुत भारी पड़ता है।

चित्रकूट प्रशासन देखेगा चिंताओं की ज्वाला: न्यू वर्ड वाटर पार्क मौत का बन रहा दहकता कुंड ?स्थानीय लोगों की डिमांड एक लाइन की है “पहले जांच, फिर फव्वारा। पहले सैंपल, फिर संभल।” उनका कहना है कि अगर आज ‘झुलसने’ को इग्नोर किया तो कल ‘झुलसाने’ वाली खबर अखबार की हेडलाइन बनेगी, और तब ‘जिम्मेदार’ की कुर्सी भी झुलसेगी। फिलहाल वाटर पार्क ‘फुल स्पीड’ में चालू है और ‘खतरे की घंटी’ भी। अब गेंद प्रशासन के पाले में है ‘जांच का डोजर’ चलाएगा या ‘हादसे का इंतजार’ करेगा? क्योंकि तिंदवारी से लेकर कर्वी तक सब कह रहे हैं पानी में ‘केमिकल’ हो तो पार्क नहीं, ‘चिता’ है ! और चिता की ‘बुकिंग’ प्रशासन अपने नाम न कराए तो बेहतर !

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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