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October 15, 2026
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बांदा का वीर सपूत इतिहास के पन्नों में गुम : अंग्रेजों और पुर्तगालियों के छुड़ाये थे छक्के
उत्तर प्रदेश

बांदा का वीर सपूत इतिहास के पन्नों में गुम : अंग्रेजों और पुर्तगालियों के छुड़ाये थे छक्के

भारतीय लोकतंत्र के महापर्व 26 जनवरी गणतंत्र दिवस की देश एवं प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं॥ अशोक त्रिपाठी जीतू ( वरिष्ठ भाजपा नेता एंव पूर्व अध्यक्ष जिला अधिवक्ता संघ, बांदा ) विज्ञापन

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। आज़ादी की लड़ाई में अंग्रेजों से लोहा लेने वाला, महात्मा गांधी के आह्वान पर सरकारी नौकरी छोड़ने वाला, गोवा मुक्ति आंदोलन में पुर्तगालियों की गोलियां झेलने वाला, और शिक्षा की नई राह दिखाने वाला वह महान व्यक्तित्व आज बांदा की यादों और इतिहास के पन्नों से लगभग गुम हो चुका है। वह थे स्वतंत्रता सेनानी, वरिष्ठ पत्रकार और शिक्षाविद स्वर्गीय राम भजन निगम। जिनका जीवन संघर्ष और साहस का अद्भुत उदाहरण है। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान वह प्रसारण अधिकारी थे, लेकिन महात्मा गांधी के “करो या मरो” के आह्वान पर उन्होंने सरकारी नौकरी को ठुकरा दिया और आज़ादी की लड़ाई में कूद पड़े। ग़दर के दिनों में उन्होंने न डर दिखाया, न लालच में आए। स्वतंत्रता सेनानी होने के बावजूद उन्होंने कभी सरकारी खजाने से एक पैसा नहीं लिया।

बांदा का वीर सपूत इतिहास के पन्नों में गुम : अंग्रेजों और पुर्तगालियों के छुड़ाये थे छक्के

1946 में इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्रोफेसर रहने के बाद, 1949 में उन्होंने बांदा में किरन कॉलेज की स्थापना की। वह नई शिक्षा पद्धति के प्रबल समर्थक थे। “मैट्रिकुलेशन इन 1 ईयर” का नारा देते हुए उन्होंने एक पेड़ के नीचे कॉलेज की नींव रखी। उनकी हस्तलिखित पुस्तक “रिवैल्युएशन इन ग्रामर” अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चर्चित हुई। ओपन यूनिवर्सिटी की अवधारणा भी उनकी पद्धति से प्रेरित मानी जाती है। 1955 में गोवा मुक्ति आंदोलन के दौरान पुर्तगालियों की गोलियों से वह गंभीर रूप से घायल हो गए। मुंबई में जर्मन डॉक्टर ने उनका इलाज किया। देश की आज़ादी और लोकतंत्र की रक्षा के लिए वह कई बार जेल गए आज़ादी से पहले अंग्रेजों की जेल, और 1975 के आपातकाल में अलीगढ़ जेल में पूरे दो साल की कैद। 1976 में लंदन टाइम्स में उनके लेख प्रकाशित होने के बाद उन पर राष्ट्रद्रोह का मुकदमा चला। लेकिन उनके विचारों और लेखनी ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शिक्षा, स्वतंत्रता और लोकतंत्र पर गहरी बहस छेड़ दी। राम भजन निगम न सिर्फ विचारक और क्रांतिकारी थे, बल्कि प्राकृतिक चिकित्सा में भी निपुण थे। वह सूर्य स्नान की विशेष विधि में माहिर थे और लोगों को प्राकृतिक स्वास्थ्य पद्धतियों से जीवन जीने की प्रेरणा देते थे।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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