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October 30, 2026
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चित्रकूट से विंध्याचल के बीच दौड़ेगी 'मेट्रो': रेलवे ने 'मंत्रालय' को भेजा 'मास्टर प्लान'
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

चित्रकूट से विंध्याचल के बीच दौड़ेगी ‘मेट्रो’: रेलवे ने ‘मंत्रालय’ को भेजा ‘मास्टर प्लान’

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

चित्रकूट। धार्मिक नगरी चित्रकूट, प्रयागराज और विंध्याचल (मीरजापुर) के “श्रद्धालुओं के लिए बड़ी खुशखबरी” है। सब कुछ ठीक रहा तो जल्द ही इन “तीन प्रमुख तीर्थस्थलों “के बीच “मेट्रो ट्रेन” दौड़ती नजर आएगी। उत्तर मध्य रेलवे ने इस “महत्वाकांक्षी योजना” को लेकर रेल मंत्रालय को “एक व्यापक रिपोर्ट” भेजी है, जिसमें “मल्टीमॉडल ट्रांसपोर्ट सिस्टम विकसित करने की सिफारिश” की गई है। रेलवे की यह योजना सिर्फ एक परिवहन परियोजना नहीं, “बल्कि 2047 तक के विकसित भारत के विजन” और कुंभ मेले की असीम भीड़ के प्रबंधन को ध्यान में रखकर तैयार की गई है।चित्रकूट से विंध्याचल के बीच दौड़ेगी 'मेट्रो': रेलवे ने 'मंत्रालय' को भेजा 'मास्टर प्लान'महाकुंभ के दौरान प्रयागराज और चित्रकूट में करोड़ों श्रद्धालुओं के आने से “यातायात व्यवस्था” चरमरा जाती है। रेलवे की रिपोर्ट कहती है कि “वर्तमान सड़क और रेल व्यवस्था के भरोसे भविष्य की भीड़ को संभालना नामुमकिन” होगा। रिपोर्ट में सबसे “अहम खुलासा भविष्य की जनसंख्या” को लेकर है। अगले दो दशकों में प्रयागराज और चित्रकूट की आबादी लगभग “डेढ़ गुना” बढ़ जाएगी और शहर से 25 से 30 किलोमीटर तक का पूरा इलाका शहरी क्षेत्र में तब्दील हो जाएगा। ऐसे में केवल सड़कों को चौड़ा करने से काम नहीं चलेगा। लाखों लोगों के रोजाना आवागमन के लिए “उच्च क्षमता वाले पब्लिक ट्रांसपोर्ट यानी मेट्रो नेटवर्क” को अपनाना ही “एकमात्र उपाय” होगा।चित्रकूट से विंध्याचल के बीच दौड़ेगी 'मेट्रो': रेलवे ने 'मंत्रालय' को भेजा 'मास्टर प्लान'रेलवे ने “स्पष्ट चेतावनी” दी है कि “मेट्रो को केवल प्रयागराज नगर निगम की सीमा तक सीमित रखना बेअसर साबित” होगा। इससे “जाम खत्म नहीं होगा, बल्कि एक जगह से दूसरी जगह शिफ्ट” हो जाएगा। इसलिए “मेट्रो कॉरिडोर को सीधे विंध्याचल और चित्रकूट तक जोड़ा” जाना चाहिए। इससे “धार्मिक सर्किट को एक तेज, सुरक्षित और स्थायी बैकबोन” मिलेगा। प्रस्ताव के तहत ओरिजिन-डेस्टिनेशन सर्वे के आधार पर “प्रमुख दिशाओं में सड़क और रेल के डेडिकेटेड कॉरिडोर” बनाए जाएंगे। मंडल पीआरओ अमित कुमार सिंह ने बताया कि महाकुंभ के अनुभव के बाद ही यह प्रस्ताव तैयार किया गया है, ताकि अगले कुंभ में लाखों श्रद्धालुओं की निकासी आराम से हो सके और आम दिनों में भी स्थानीय लोगों को विश्वस्तरीय परिवहन सुविधा मिले।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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