
- शरद मिश्रा
चित्रकूट। जनपद में ‘बाढ़’ नहीं, ‘साक्षात प्रलय’ आ गया है ! लगातार हो रही ‘मूसलाधार अतिवृष्टि और पहाड़ों’ से आ रहे ‘सैलाब’ ने ‘मंदाकिनी नदी’ को ‘राक्षसी रूप’ दे दिया है।
नदी पुनः उफान पर नहीं, बल्कि शहर को निगलने के लिए मौत बनकर दौड़ रही है। हालात पूरी तरह से प्रशासन के नियंत्रण से बाहर हो चुके हैं, चारों तरफ ‘हाहाकार’ मचा है।
इस ‘भयावह और दिल दहला’ देने वाली स्थिति को देखते हुए जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने ‘हाथ जोड़कर’ जिले के लोगों से ‘अंतिम अपील’ की है।
जिलाधिकारी ने ‘चेतावनी भरे लहजे’ में कहा है कि इस वक्त ‘घर-बार’ की चिंता छोड़ दो, पहले अपनी और बच्चों की जान’ बचाओ ! उन्होंने साफ कहा है कि ‘अगर बचना है तो तुरंत अपना घर खाली’ कर दो। क्योंकि जिस ‘रफ्तार से पानी बढ़’ रहा है, मंदाकिनी ‘दो दिन पहले के सारे रिकॉर्डों’ को ‘तोड़कर’ पूरे ‘शहर को जल समाधि’ दे सकती है।
डीएम की यह चेतावनी नहीं, खतरे की अंतिम घंटी है। आने वाले 2-3 घंटे चित्रकूट के लिए ‘काल’ बन सकते हैं। नदी किनारे बसे हजारों घरों में ‘सैलाब घुस’ चुका है, लोग छतों पर ‘जान बचाने के लिए चीख’ रहे हैं। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में ‘पानी नहीं, मौत घुस’ रही है।
प्रशासन ने बाढ़ राहत शिविर बनाए हैं, लेकिन ‘प्रलय के आगे सब बौना’ है। इसलिए कोई लापरवाही मत करो, तुरंत परिवार सहित घर छोड़कर शिविरों में शरण लो। याद रखो, घर दोबारा बन जाएगा, जान गई तो सब खत्म !
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