
- शरद मिश्रा
बांदा। एक तरफ सरकार “हर घर जल” का दावा कर रही है, दूसरी तरफ बांदा जिले के जसपुरा विकासखंड की ग्राम पंचायत रामपुर में लोग “बूंद-बूंद पानी” के लिए “भटक” रहे हैं। हालात इतने खराब हैं कि महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों को पीने का पानी भरने के लिए एक-एक किलोमीटर दूर तक जाना पड़ रहा है। सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि जब हैंडपंपों की मरम्मत के नाम पर हर महीने लाखों रुपये खर्च होने का दावा किया जाता है, तो फिर गांव के हैंडपंप कबाड़ में क्यों तब्दील हो चुके हैं ? आखिर यह पैसा किसकी जेब में समा रहा है? भीषण गर्मी के बीच रामपुर गांव के लोग उस मूलभूत सुविधा के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जो हर नागरिक का अधिकार है।

गांव के कई हैंडपंप महीनों से खराब पड़े हैं। महेश पाठक, जगदीश यादव, श्री लाल कुशवाहा, विश्वनाथ निषाद और लोखरी निषाद के घरों के पास लगे हैंडपंप केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि कई बार शिकायत की गई, लेकिन किसी अधिकारी या जिम्मेदार प्रतिनिधि ने गांव की “सुध” लेने की जरूरत नहीं समझी। सरकार की “महत्वाकांक्षी नमामि गंगे योजना”, जिसके नाम पर “करोड़ों रुपये खर्च” किए जा रहे हैं, रामपुर में “दम तोड़ती” नजर आ रही है। तीन दिन पहले आए आंधी-तूफान के बाद बिजली आपूर्ति बाधित हुई और उसके साथ ही पानी की सप्लाई भी “बंद” हो गई।
ग्रामीण “सवाल” उठा रहे हैं कि यदि एक बिजली कटौती से पूरी “जलापूर्ति व्यवस्था ध्वस्त” हो जाती है, तो फिर इस योजना की मजबूती के दावे कितने सच हैं? यही वह सवाल है जिसने पूरे मामले को “गंभीर” बना दिया है। गांव के लोगों का आरोप है कि उन्होंने कई बार ग्राम प्रधान, प्रधान प्रतिनिधि और सचिव को समस्या से अवगत कराया, लेकिन किसी ने गंभीरता नहीं दिखाई।
बीडीओ तक शिकायत पहुंचने के बाद सचिव अरुण कुमार को हैंडपंप सही कराने के निर्देश दिए गए, लेकिन न सचिव गांव पहुंचे और न ही प्रधान प्रतिनिधि ओम प्रकाश यादव ने कोई पहल की। इससे ग्रामीणों में आक्रोश लगातार बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का आरोप है कि “हैंडपंपों की मरम्मत और रखरखाव” के नाम पर हर महीने “धन” निकाला जाता है, लेकिन गांव की स्थिति देखकर ऐसा लगता है जैसे वर्षों से किसी ने मरम्मत का काम किया ही नहीं। गांव वालों का कहना है कि यदि जांच हो जाए तो कई “चौंकाने वाले तथ्य” सामने आ सकते हैं। लोग पूछ रहे हैं “जब पैसा खर्च हो रहा है तो पानी क्यों नहीं आ रहा? जब योजनाएं चल रही हैं तो लोग प्यासे क्यों” हैं ?
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