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समाधान दिवस बना रस्म अदायगी: जनता की उम्मीदें फाइलों में कैद, अफसरशाही सुस्त !
उत्तर प्रदेश

समाधान दिवस बना रस्म अदायगी: जनता की उम्मीदें फाइलों में कैद, अफसरशाही सुस्त !

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

  • शरद मिश्रा

बांदा। जिला प्रशासन की एक और नाकामी सामने आई है ! जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के लिये आयोजित सम्पूर्ण समाधान दिवस का हाल खुद बयां कर रहा है कि आम आदमी की पीड़ा सिर्फ कागजों में दर्ज हो रही है, समाधान तो बस प्रतीक्षा की कतार में है। तहसील सदर में आयोजित समाधान दिवस में कुल 67 जनशिकायतें दर्ज हुईं, लेकिन मौके पर सिर्फ 8 मामलों का ही निस्तारण हो सका। शेष शिकायतें फाइलों की भूलभुलैया में गुम हो गईं, और जनता मायूस होकर लौट गई।

समाधान दिवस बना रस्म अदायगी: जनता की उम्मीदें फाइलों में कैद, अफसरशाही सुस्त !

डीएम जे. रीभा की अध्यक्षता में हुए समाधान दिवस में पुलिस अधीक्षक पलाश बंसल, उप जिलाधिकारी नमन मेहता, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद रहे, लेकिन सक्रियता नदारद रही। जिलाधिकारी ने मंच से अफसरों को “समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण निस्तारण” का पाठ तो पढ़ाया, लेकिन ज़मीनी हालात इससे बिल्कुल उलट दिखाई दिये। जनता ने उम्मीद के साथ अपनी पीड़ा बताई किसी के आवास के पट्टे पर कब्जा, तो कोई खेत के रास्ते को रोके जाने से परेशान, कहीं नगर क्षेत्र में जलभराव, तो किसी का मकान जबरन छीन लिया गया। लेकिन इन तमाम मामलों में समाधान नहीं, बल्कि सिर्फ निर्देशों की खानापूर्ति हुई।

समाधान दिवस बना रस्म अदायगी: जनता की उम्मीदें फाइलों में कैद, अफसरशाही सुस्त !

ग्राम कनवारा में आवास के पट्टे पर कब्जे की शिकायत पर लेखपाल को जांच का निर्देश दिया गया। गल्ला मंडी में जलभराव के मसले पर नगर मजिस्ट्रेट को मौके पर जाकर व्यवस्था सुधारने के आदेश दिये गये। लड़ाका पुरवा में मकान पर कब्जे के मामले में लेखपाल को जांच कर कार्यवाही का निर्देश। हरदौनी ग्राम में खेत के रास्ते पर अवैध कब्जे की शिकायत पर लेखपाल और एसएचओ को जाँच करने को कहा गया। लेकिन यह सब निर्देश थे, समाधान नहीं। जनता को ‘काम हो जायेगा’ कहकर लौटाया गया यही समाधान दिवस की विफलता का प्रमाण है। समाधान दिवस का मूल उद्देश्य है जन सुनवाई और त्वरित कार्रवाई। लेकिन जब 67 में से केवल 8 मामलों में कार्रवाई होती है, तो यह केवल “दिखावे का आयोजन” बनकर रह जाता है।

 

 

 

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