- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले की पैलानी तहसील की “खेरई बालू खदान”, डीएम दुर्गा शक्ति पाल को ठेंगा दिखा रही है। “डीएम लोकसभा चुनाव कराने में व्यस्त” हैं और “खदान संचालक पहलवान अवैध खनन में मस्त” है। इसमें “खनिज विभाग” डीएम दुर्गा शक्ति के लिये “जयचंद के रोल” में है ? बताते हैं की कथित तौर पर “ओटीपी बंद” हो जानें के बाद भी अवैध खनन के लिये इन दिनों यह “खेरई खदान विशेष चर्चा” में सीएम योगी एवं “डीएम दुर्गा शक्ति के लिये चैलेंज” के रूप में उभरी हैं। इस खदान के “मीडिया दलाल भी भी इनको शह देकर अपना खजाना” भर रहें हैं। इनकी “आपसी दुरभि संधि” चर्चा का विषय है।

अब कहानी समझिये पहलवान ट्रेडर्स के नाम से बालू खदान की कंपनी अवैध बालू खनन को लेकर एक माह पहले जुर्माना लगा था। इसके बाद से कथित ओटीपी बंद है, लेकिन “अवैध खनन की पहलवानी” निरन्तर चालू है, इसमें खनिज विभाग की पूरी शह बताई जा रही है? “अवैध खनन की रणनीति के तहत दिन में खनन कार्य बंद रखते हैं और रात में अंधाधुंध खनन और परिवहन का कार्य शुरू” हो जाता है ! रात में जो खनन होता है उस “गड्डे को सुबह होने तक भर दिया” जाता है ताकि “बचाव का प्वाइंट” रहे। इन गतिविधियों के तहत यहां का “दबंग ठेकेदार जिला प्रशासन को चैलेंज के मूड में ताल ठोंक रहा” है ?

मानों है “कोई माई का लाल जो उसके अवैध खनन को लगाम लगा सके”। चौंकाने वाला दुस्साहस भरा आलम यह है की कानून खदान बंद होने के बाद भी “यहां अवैध खनन की सीमायें लांघ दी गई हैं। योगी सरकार की खनन नीति यहां ठेंगे” पर हैं। अवैध खनन का सिलसिला अनवरत जारी हैं। इसपर प्रशासन में “गजब” की “खामोशी” हैं। पोकलैंड मशीनों द्वारा खनन दिन में लुका छिपी और रात में निरन्तर चल रहा है। इस अवैध खनन से “तलहटी क्षेत्र भी गहरे तालाब से हो गये हैं ! कभी भी बड़े हादसे की शंका को भी नजर अंदाज नहीं किया जा सकता”।

खदान खेरई में खास बात यह है कि “डीएम दुर्गा शक्ति नागपाल के अवैध खनन पर सख्ती के आदेश के बावजूद संबंधित अधिकारी एवं ठेके दार अवैध खनन से माला-माल हो सरकार के विरुद्ध राक्षसी अट्टाहस” कर रहे है ? “प्रत्यक्षम किम प्रमाणं” पर गजब की “नजर अंदाजी” है ! एक खतरनाक स्थिति यह भी है बाकायदा असलहा धारी इनकी निगरानी करते है। क्या मजाल कोई गांव वाला इनका विरोध करे। आपको बता दें की “खेरई बालू खदान हम किसी से कम नहीं” की तर्ज पर “सरकारी राजस्व को करोड़ों का चूना” लग रहा है। साथ ही प्रशासन की “खामोशी” से “योगी सरकार की खनन नीति” की धज्जियां उड़ रहीं हैं ?
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