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October 13, 2026
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बुंदेलखंड में गुम हो चुके “इसुरी के फाग” होली में हो उठते हैं “जीवंत” !
उत्तर प्रदेश

बुंदेलखंड में गुम हो चुके “इसुरी के फाग” होली में हो उठते हैं “जीवंत” !

होली पर्व की हार्दिक बधाई एंव शुभकामनाएं || सुनील पटेल ( जिला पंचायत अध्यक्ष, बांदा ) विज्ञापन

  • विनोद मिश्रा

बांदा। भारतेंदु युग के लोक कवि ईसुरी आज भी बुंदेलखण्ड में सर्वाधिक लोकप्रिय कवि है। होली पर्व पर गाए जाने वाली फागों के बादशाह है। उनकी रचनाओं में ग्रामीण संस्कृति एवं सौन्दर्य का वास्तविक चित्रण मिलता है। होली पर्व आते ही इसुरी कवि की यादे तरोदाजा हो जाती है। फाग गायक बताते हैं कि प्रदेश के झांसी जनपद के मऊरानीपुर कस्बे के पास मेढ़की गांव में जन्म लेने वाले इसुरी कवि नें युवा होने पर फागों की अनेक रचनाएं की जो बुंदेलखंड के लोगों को बेहद रास आती है। 180 साल पूर्व जन्में ईसुरी कवि की मृत्यु 1909 में हो गई थी। किन्तु अपनी रचनाओं के दम पर ईसुरी कवि आज भी चर्चा में है।

बुंदेलखंड में गुम हो चुके “इसुरी के फाग” होली में हो उठते हैं “जीवंत” !
The “Fags of Isuri” that were lost in Bundelkhand become “alive” on Holi!

प्रख्यात समाजसेवी अखिल भारतीय समाज सेवा संस्थान के संस्थापक बांदा निवासी फाग गायक गोपाल भाई बताते हैं कि ईसुरी कवि की रचनाओं में बुंदेली लोकजीवन की संरसता, मादकता और सरलता और राग युक्त संस्कृति की रसीली रागिनी से मदमस्त करने की क्षमता है। उनकी रचनाएं प्रगतिवर्धक, जीवन श्रृंगार, सामाजिक परिवेश, राजनीति भक्तियोग, संयोग, वियोग, लौकिकता, शिक्षा, चेतावनी, काया और माया पर आधारित है। ग्राम्य संस्कृति का पूरा इतिहास केवल ईसुरी की फागों में मिलता है।

बुंदेलखंड में गुम हो चुके “इसुरी के फाग” होली में हो उठते हैं “जीवंत” !
The “Fags of Isuri” that were lost in Bundelkhand become “alive” on Holi!

फागो में करुणा, प्रेम, श्रृंगार, सहानुभूति, हृदय की कसक एवं मार्मिक अनुभूतियों का सजीव चित्रण है। उन्होंने बताया कि इसुरी कवि ने राधा-कृष्ण व राम पर आधारित कई फागो की रचना भी की है। जिसे लोग बड़े चाव से गाते हैं। ईसुरी कवि ने अपनी फागो के माध्यम से लोगों को आपस में मिल जुलकर रहने, ईश्वर की भक्ति करके जीवन सफल बनाने तथा मानवीय मूल्यों के प्रति सजग रहने का संदेश दिया गया है। इस तरह बुंदेलखंड में न ज्यादा सही एक दो दिन ही सही मगर होली के त्योहार में ईसुरी कवि की फागों के माध्यम से अवश्य याद किया जाता है। उनकी फागे गाई जाती है लोग सुनते और आनन्द उठाते हैं।

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 
 



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