- विनोद मिश्रा
बांदा। “आयुर्वेद चिकित्सा व्यवस्था गलत नीतियों के चलते ढ़ेर हो सिसक” रही है। बांदा एवं चित्रकूट के सभी पैंतीस आयुर्वेद चिकित्सालयों में आयुर्वेदिक औषधियाँ वर्तमान में उपलब्ध नहीं है। “हजारों मरीज दर -दर भटक” रहे हैं, जबकि शासन से यहां 16 दिनों पूर्व भारी मात्रा में औषधियाँ आई हैं। जो स्टोर में डंप हैं।

उल्लेखनीय है कि बाँदा नगर में दो आयुर्वेदिक चिकित्सालय हैं, इन दोनों चिकित्सालयों सहित जनपद बाँदा के चौबीस और चित्रकूट के ग्यारह चिकित्सालयों कोई भी औषधि नहीं है। मरीज परेशान बेहाल हैं। पूरा फंडा समझिये, चिकित्सा निदेशालय से औषधियों का भंडार यहां क्षेत्रीय आयुर्वेदिक कार्यालय भेज दिया गया है और क्षेत्रीय कार्यालय की ओर से दोनों जनपदों के सभी चिकित्साधिकारियों को लिखित सूचित है कि वे अपने चिकित्सालयों के लिए औषधियाँ ले जाएँ।

इधर चिकित्साधिकारियों का कहना है कि क्षेत्रीय कार्यालय से अपने चिकित्सालयों तक औषधियों की ढुलाई का खर्च कौन वहन करेगा। वे लोग पिछले सात वर्षों से अपनी जेब से ढुलाई भुगतान रहे हैं,अब नहीं करेंगे। क्षेत्रीय कार्यालय के अनुसार औषधि सप्लाई करने वाली कंपनियों की जिम्मेदारी है कि वह प्रत्येक चिकित्सालय में औषधियाँ पहुँचाए, लेकिन ऐसा नहीं होता।

बहरहाल कुल मिलाकर स्थति यही है कि सभी जिम्मेदार अधिकारी और चिकित्सक अपनी-अपनी जिम्मेदारी एक दूसरे पर आरोपित करके चैन की बंशी बजा रहे हैं और जनता सरकार को कोस रही है। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू नें इस संबंध में आयुष मंत्री को पत्र लिखा है।
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