- विनोद मिश्रा
बांदा। ” डाकिया डाक लाया, डाकिया डाक लाया ” पर नहीं जिले में डाकिया डाक वितरित करनें की बजाय जलाता हैं की कहानी चरितार्थ हो रही है! कोतवाली में मुकदमा पंजीकृत हो जानें के बावजूद जिले के डाक अधिकारी नें कथित निकम्मे डाकिये का निलंबन भी नहीं किया! आरोप हैं की ले देकर संबंधित डाकिया को विभाग जांच की खाना पूरी कर उसे बचाने के लिये सुरक्षा कवच पहनने में लगा हैं। डाक वितरण की बजाय डाक जलाकर तमाम बेरोजगार युवकों की डिग्रियां, काल लेटर जला देनें वाले दबंग डाकिया का अट्टाहस पूरे क्षेत्र में गूंज रहा हैं, पर डाक विभाग के आला अफसर कथित तौर पर सुविधा शुल्क पाने की खुशी के हिलोरों में मग्न हैं !

जिस डाकिया की लापरवाही की खबर और विभागीय ड्यूटी के प्रति कदाचरण की खबर हम आपको बता रहें हैं वह बबेरू तहसील क्षेत्र के ग्राम मुरवल का रहने वाला है जिसका नाम है राजा भईया पाल। इसके ऊपर आरोप हैं की यह डाक बांटने की बजाय उनकों नष्ट कर देता है।ज्यादतर सरकारी लेटर डाक से आते हैं। ऐसे आने वाली डिग्रियों एंव काल लेटरों को डाकिया राजा भइया पाल नष्ट कर बेरोजगारों की जिंदगियां तबाह कर रहा है।औरअपनी इस करतूत के लिये चर्चित हो चुका हैं। परंतु एक मामले में फंस ही गया।

ग्राम मुरवल के कुलदीप सिंहकी डिग्री आरोपी डाकिया ऩे नष्ट कर दी। औऱ फर्जी हस्ताक्षर कर वितरण रिपोर्ट विभाग में सम्मलित कर दी। लेकिन मामला खुल गया औऱ उसने मोबाइल फोन पर कुलदीप की डाक नष्ट कर देना स्वीकार किया। पीडि़त नें इस रिकार्डिग की सीडी बनाकर डाकिया राजा भईया के खिलाफ तार्किक धारओं में मुकदमा कायम करवा दिया। रिपोर्ट की प्रतिलिपि डाक अधीक्षक को दी। डाकिया द्वारा अपराध स्वीकार ऩे की सीडी भी सुनवाई। विभाग नें जांच अधिकारी संजीव चौरसिया को नियुक्त किया। जांच अधिकारी काफी समय तक जांच दबाये रहे। पीडि़त ऩे जब गुहार मचाई तो अपने अधीनस्थ कर्मचारी को जांच के लिये मुवरल भेजा। उसने आरोपी डाकिया को साथ में लेकर अपने चहेते प्रधान के दरवाजे पहुंचा और डाकिया के कर्तव्यनिष्ठ होने के संदर्भ में हस्ताक्षर बनवा दिया। पीडि़त पक्ष के आरोपों के संदर्भ क़ो दबा दिया गया।
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अब महत्व पूर्ण पहलू यह हैं की डाकिया राजा भईया के खिलाफ जब विभागीय ड्यूटी को सही अंजाम न देनें का मुकदमा कायम हो गया तो विभाग क़ो एफआईआर के आधार पर उसे निलंबित कर जांच करानी चाहिए उस पर नजारा यह की जो जांच करनें गांव पहुंचा वह आरोपी डाकिया को भी साथ लिये था। आखिर क्यो? जांच के मूल बिंदु को दरकिनार क्यो किया गया। जांच दौरान पीडि़त पक्ष के बयान औऱ सबूत क्यो नहीं लिये गये! यह घोर आश्चर्य का विषय हैं जो इस बात की ओर इशारा करता हैं की विभाग आरोपी से ले देकर उसे बचाने की भरपूर कोशिश कर रहा हैं। दूसरी ओर पीडि़त कुलदीप और उसके परिजनों ऩे न्याय न मिलने की दशा में जिला मुख्यालय पर अनशन की चेतावनी दी हैं। शिकायत पत्र भी राज्य सरकार से लेकर केँद्र सरकार तक भेजा हैं।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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