- विनोद मिश्रा
बांदा। भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष अशोक त्रिपाठी जीतू नें निजी स्कूल प्रबंधकों द्वारा बच्चों को स्कूली वाहन उपलब्ध कराने की मनमानी पर सवाल उठाएं हैं। अभिभावको के आर्थिक शोषण की भी बात कही हैं। इसके कारण अधिकांश अभिभावक मजबूरी में ई रिक्शा और ऑटो से मासूमों को स्कूल भेजने का खतरा मोल लेते हैं।

उन्होने कहा कि निजी स्कूल बस का किराया मनमानी किए हैं। जब की स्कूल का किराया बच्चे की घर से स्कूल तक की वास्तविक दूरी को मानक मानकर ही निश्चित होना चाहिए। ज्यादातर निजी स्कूल बस का किराया उस अवधि का भी जमा करने का दबाव डालते हैं जिस अवधि में स्कूल बंद रहा अथवा अवकाश रहा। निजी स्कूल ट्यूशन फीस की भांति स्कूल का किराया भी 3 महीने का एडवांस लेते हैं,परंतु बच्चों के लिए सीट का अलॉटमेंट नहीं करते हैं जिस कारण से स्कूल आने जाने वाले वाहनों में ओवरलोडिंग हो जाती है।

पूर्व जिलाध्यक्ष नें सलाह दी है कि निजी शिक्षण संस्थानों को चाहिए कि उनके विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चों को और उनके माता-पिता को ऐसी सुविधाएं प्रदान करें और मिनिमम किराया तय करें,जो वास्तविक दूरी के अनुरूप हो। इस कार्य में ज्यादा लाभ लेने की मानसिकता से बचना चाहिए।
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