- विनोद मिश्रा
बांदा। किसानों की होगी अब बल्ले -बल्ले क्योंकि बुंदेलखंड प्राकृतिक खेती का हब बनेगा। इसके लिये मुख्यमंत्री द्वारा लगातार जोर दिया जा रहा है। बुंदेलखंड के साताें जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट, महोबा, झांसी,जालौन को चयनित किया गया है। इसमें कम लागत पर सिर्फ गो आधारित खेती होगी। जिसमें गोमूत्र बने पदार्थ शामिल हैं।

जिला कृषि रक्षा अधिकारी प्रमोद कुमार बताते हैं कि प्राकृतिक खेती किसानों के लिए काफी फायदेमंद है, इसके साथ ही इस खेती के माध्यम से कुछ किसान कम समय में दोहरा लाभ भी कमा रहे हैं। इससे फसलों की उत्पादकता क्षमता बढ़ती है। इसमें किसी भी तरह का रसायन का प्रयोग नहीं होता है जिससे इनकी मांग भी ज्यादा है। आने वाले समय में प्राकृतिक खेती का हब बुंदेलखंड बनेगा।

अब यह भी जान लीजिए कि इस तकनीक में क्या फसलें उगाई जायेगी तो इसमें गेहूं, मक्का, मूंगफली, उड़द, तिल, सरसो, चना, मटर, मसूर, दलहनी, तिलहनी, सब्जी, बेलदार पौधे का उत्पादन बेहतर है।

बांदा जिले के देश – विदेश में मशहूर बड़ोखर के प्रगतिशील किसान प्रेम सिंह बताते हैं कि बुंदेलखंड में प्राकृतिक खेती की अपार संभावनाएं हैं। अभी कुछ किसान प्राकृतिक खेती का काम रहे हैं। अब सरकार ने घोषणा की है तो किसानों का दायरा और रकबा और बढ़ेगा।
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