- विनोद मिश्रा
बांदा। जनपद से विदेश में पढ़ाई करने वाले लोगों की कमी नहीं है। अब तक तीन नाम सामने आए हैं, जो यूक्रेन में फंसे हुए हैं। एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए गए इन छात्र-छात्राओं को वर्तमान समय में जीवन और मौत से जूझना पड़ रहा है। हर पल मौत के साए में गुजर रहा है। अचानक रूस के द्वारा यूक्रेन पर हमला कर देने की वजह से विदेश में रह रहे अपने बच्चों को लेकर परिजनों की बेचैनी बढ़ गई है। मालुम हो कि बिसंडा के नीरज गुप्ता, शहर के छावनी मुहल्ला निवासी रफीक मंसूरी ग्राम पंचायत सचिव की बेटी अलीशा भी यूक्रेन में फंसी हुई है। इसके साथ ही शहर के सेढ़ू तलैया मुहल्ले में रहने वाले रिटायर्ड प्राचार्य चुन्ना सिंह का छोटा बेटा हेमेंद्र कुमार सिंह भी यूक्रेन में फंसा हुआ है।

वर्ष 2019 में वह एमबीबीएस की पढ़ाई करने के लिए यूक्रेन गया हुआ है। वहां रहकर वह वीएन काराजिन खारकीव नेशनल यूनिवर्सिटी में तीसरे वर्ष की शिक्षा अध्ययन कर रहा है। शनिवार को हेमेंद्र ने अपने पिता चुन्ना और मां शकुंतला से मोबाइल फोन पर बात करते हुए कहा कि इन दिनों वह मेट्रोल के टनल में अपने साथियों के साथ छिपे हुए हैं। किसी तरह से दिन गुजार रहे हैं। खाने-पीने का भी विशेष इंतजाम नहीं हैं। कुछ दिनों का राशन ही उनके पास बचा है।
हेमेंद्र ने बताया कि यूक्रेन में दुकानदार भारतीयों को सामान नहीं दे रहे हैं। सिर्फ यूक्रेन के रहने वालों को ही सामान दिया जा रहा है। हेमेंद्र के मुताबिक हालात बहुत ही खराब हैं, चारों ओर धमाके ही धमाके हो रहे हैं। हेमेंद्र के परिवारीजनों ने प्रधानमंत्री से मांग की है कि यूक्रेन में फंसे उनके बच्चों और अन्य लोगों को जल्द से जल्द सकुशल वापस लाया जाए।
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