- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में पांच दिनों तक चलने वाला दीपावली पर्व परंपरागत में हर्षोल्लास के साथ संपन्न हुआ दीपावली पांच दिवसीय पर्व है, जिसके पहले दिन धनतेरस, दूसरे दिन नर्कचौदस, तीसरे दिन दिवाली, चौथे दिन गोवर्धन पूजा व आखिरी यानि पांचवें दिन भाईदूज मनाया जाता है।

दिवाली के बाद कार्तिक शुक्ल द्वितिया यानी भाई दूज आता है और इसी दिन चित्रगुप्त महाराज की पूजा भी की जाती है। इसी क्रम में भाईदूज का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को संजोता पूरे उमंग और उत्साह से मनाया गया।

मान्यता है कि बहन का यह तिलक भाई को अकाल मृत्यु से बचाता है और मंगलकामना लेकर आता है। वहीं इसी के साथ इस दिन चित्रगुप्त महाराज की भी पूजा की गई।
पौराणिक कथाओं के मुताबिक, भगवान चित्रगुप्त का जन्म ब्रह्मा के अंश से हुआ है। वह यमराज के सहयोगी हैं ,और कर्मों का लेखा जोखा रखते हैं। चित्रगुप्त ही जन्म से लेकर मृत्यु तक इंसान और जीवों के सभी कर्मों को अपनी पुस्तक में लिखते रहते हैं।
जब जीवात्मा मृत्यु हो जाती है तो वह यह लेखा-जोखा यमराज तक पहुंचाते हैं और फिर कर्मों के आधार पर दंड दिया जाता है। चित्रगुप्त महाराज की पूजा विशेषकर कायस्थ वर्ग में मुख्य रूप से प्रचलित है। वह उनके ईष्ट देव हैं। बांदा में चित्रगुप्त मंदिर में समाज के लोगों नें पूजा-अर्चना की। इनकी पूजा करने से लेखन, वाणी और विद्या का वरदान मिलता है।
( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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