- विनोद मिश्रा
बांदा। जिले में इस दिवाली पर शहर में 80 फीसदी ग्रीन पटाखें फूटेंगे। इसकी वजह- पटाखा बनाने वाली कंपनियों द्वारा इस बार ग्रीन पटाखों की सप्लाई ज्यादा की जाना है। इन ग्रीन पटाखों के पैकेट पर लोगो और क्यूआर कोड दिया है, ताकि लोग इनकी असलियत का पता लगा सकें।

पटाखा कारोबारियों ने बताया कि इस बार यहां पर करीब दो करोड़ से ज्यादा के पटाखे का स्टॉक आ चुका हैं।इस बार कोविड संक्रमण कम है। पिछले दो साल में पटाखा कारोबार में कमी आई है। शहर में पहले जहां पर सालाना करीब एक करोड़ का कारोबार होता था, इस बार बढ़ने की उम्मीद है।

इधर जीआईसी मैदान में पटाखा बाजार लगाया गया है। लोग पटाखा खरीदने पहुंच रहे हैं। फुटकर ग्राहकों के अलावा यहां पटाखे की छोटी दुकान लगाने वाले ग्राहकों की भी भीड़ है। दुकानों में भारी मात्रा में स्टॉक भरा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की माने तो पटाखों की टेस्टिंग की गई है। दुकानों में तय मानक और गाइडलाइन का पालन हो रहा है या नहीं इसकी भी जांच की जाएगी।

एनईईआरआई और सीएसआईआर ने पटाखों में इस्तेमाल होने वाले बरियम नाइट्रेट के स्तर की जांच कर ग्रीन पटाखों का नया मानक बनाया है। ग्रीन पटाखों में 30% से लेकर 90% तक बरियम नाइट्रेट का इस्तेमाल कम किया है। कुछ पटाखों में इसका बिल्कुल भी इस्तेमाल नहीं किया। ग्रीन पटाखें की पहचान के लिए एनआरआई का ग्रीन लोगो और क्यू आर कोड दिया गया है।
डीएम अनुराग पटेल ने कहा है कि व्यापारी कोविड गाइडलाइन पालन करें। पटाखा बेचने और खरीदने वाले दोनों मास्क लगायें।दुकान पर सैनिटाइजर रखे। सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करें।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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