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October 16, 2026
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बालू माफिया बेलगाम: बांदा में डंप कारोबारियों का राज, प्रशासनिक खामोशी पर उठे सवाल ?
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

बालू माफिया ‘बेलगाम’: बांदा में ‘डंप कारोबारियों’ का राज, प्रशासनिक ‘खामोशी’ पर उठे सवाल ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले की धरती इन दिनों ‘बालू की सुनहरी रेत’ से नहीं, बल्कि ‘प्रशासनिक खामोशी और बेखौफ मौरंग माफिया’ की साजिशों से तप रही है। जिले में डंप लाइसेंस धारकों का खेल इस हद तक बेलगाम हो गया है कि शासन द्वारा तय सीमा, नियम और शर्तें अब सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई हैं।

बालू माफिया 'बेलगाम': बांदा में डंप कारोबारियों का राज, प्रशासनिक 'खामोशी' पर उठे सवाल ?जिले में 30 जून से नदियों में खनन पर रोक लग चुकी है, लेकिन इसके बाद जो खेल शुरू हुआ है, वह कहीं ज्यादा गंभीर और चौंकाने वाला है। अब ‘डंप का धंधा’ परवान चढ़ा है। वह भी बेधड़क, बेकाबू और बेतहाशा ! खनिज विभाग ने इस मानसून सीजन में 30 कारोबारियों को डंप के लिए लाइसेंस जारी किए हैं। शासन ने इन लाइसेंसधारकों के लिए घन मीटर में स्पष्ट मात्रा तय की है, लेकिन ज़मीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है।

बालू माफिया 'बेलगाम': बांदा में डंप कारोबारियों का राज, प्रशासनिक 'खामोशी' पर उठे सवाल ?नियमानुसार डंप स्थल खनन पट्टा क्षेत्र से कम से कम पांच किलोमीटर की दूरी पर होना चाहिए। साथ ही खनन पट्टा धारक व उनके नजदीकी रिश्तेदार डंप का लाइसेंस नहीं ले सकते। लेकिन यहां ‘जुगाड़ तंत्र’ सबकुछ साध देता है। परिणाम वही पट्टा धारक अब डंप कारोबारी बन बैठे हैं और नदियों के मुहाने पर ही बालू का भंडारण कर रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अधिकतर लाइसेंस धारकों ने तय मात्रा से कई गुना ज्यादा बालू डंप कर रखी है। निरीक्षण हो तो हकीकत सामने आ सकती है, लेकिन खनिज विभाग की आंखों पर ‘लक्ष्मी छाया’ की पट्टी बंधी है।

बालू माफिया 'बेलगाम': बांदा में डंप कारोबारियों का राज, प्रशासनिक 'खामोशी' पर उठे सवाल ?बारिश में खनन बंद होने से बालू के दाम आसमान छू रहे हैं, और इस मौके को ‘बिक्री उत्सव’ में बदल चुके हैं डंप कारोबारी। तय मात्रा के बाहर मौरंग बेचकर ये लाखों नहीं, करोड़ों का खेल खेल रहे हैं वह भी प्रशासन की खामोशी के साए में। खनिज अधिकारी राज रंजन दावा करते हैं कि “डंप बालू कारोबारियों का आकस्मिक निरीक्षण कराया जाएगा। विभाग की सख्त निगरानी रहेगी।” पर डंप कारोबारी फिलहाल पूरी तरह बेखौफ हैं। क्या विभाग ने अचानक निरीक्षण कर तय मात्रा की जांच की ? क्या अब तक किसी डंप पर जब्ती या लाइसेंस निरस्तीकरण की कार्रवाई हुई? नदियों के पास खुलेआम डंपिंग पर कोई सख्ती क्यों नहीं? इन सवालों के जवाब देने को विभाग तैयार नहीं !

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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