- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड के विध्यांचल क्षेत्र में पौधरोपण, वन्यजीव व पर्यावरण संरक्षण के नाम पर करोड़ों खर्च को लेकर जनहति याचिका ऩे वन विभाग को आफत में डाल रखा है। हालत “मैं क्या करू हाय राम हाये” की सी हो गई है।पीआइएल पर सुनवाई करते हुए उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस गोविद माथुर व जस्टिस सौरभ श्याम की मुख्य पीठ ने बुधवार को खर्च राशि का रिकार्ड तलब किया है। इस मामले में 15 फरवरी को सुनवाई होगी।वरिष्ठ अधिवक्ता धर्मपाल सिंह, सत्यव्रत त्रिपाठी, सिद्धार्थ निरंजन ने पीआइएल पर बहस की । बुंदेलखंड के सात जनपदों में वन विभाग द्वारा पौधरोपण, वन समृद्धिकरण, वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़ा यह मामला है। सितंबर 2020 से इस मामले की पैरवी हो रही हैं। वर्ष 2011-12 में सीएजी की आडिट रिपोर्ट का हवाला है।बुंदेलखंड में तत्कालीन बसपा सरकार के समय विशेष पौधरोपण अभियान सात जनपदों में हुआ, जिसमें दस करोड़ पौधरोपण पर 40 करोड़ रुपये का घोटाला खुलासे होने पर सितंबर 2020 को मुख्य वन संरक्षक अनुश्रवण एवं मूल्यांकन इकाई लखनऊ को शिकायत की गई थी।
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तत्कालीन आइएफएस अधिकारी पवन कुमार ने जांच बुंदेलखंड जोन के मुख्य वन संरक्षक पीपी सिंह झांसी को सौंप दी। वन संरक्षक झांसी ने यह जांच चित्रकूट डीएफओ कैलाश प्रकाश को दी। उन्होंने उप प्रभागीय वन अधिकारी आरके दीक्षित को जांच देकर किनारा कर लिया। जांच आठ माह तक लटकी रही और आरटीआइ से जवाब मांगने पर डीएफओ चित्रकूट ने बरगढ़ ब्लाक की वन रेंज देशाह में सात जनपद की जांच आख्या निपटा दी।

जनहित याचिका शपथपत्र व साक्ष्यों को उच्च न्यायालय में जनहित याचिका दायर की, जिसे पीआइएल में परिवर्तित कर रिट दाखिल हुई। बुंदेलखंड परिक्षेत्र के अंदर एक दशक के दौरान तीन सौ करोड़ के घोटाले और सीएजी की ऑडिट रिपोर्ट पर कार्यवाही न होने को आधार बनाया गया। बांदा के गिरते वन क्षेत्र 1.21 हे. सहित अन्य जनपदों के आरटीआइ से जुटाए आंकड़े शामिल करके हर साल करोडों के पौधरोपण खेल के लिए वनविभाग को जिम्मेदार ठहराया गया।
इलाहाबाद मुख्य न्यायपीठ ने बुधवार को आदेश देकर प्रदेश सरकार से पौधरोपण पर खर्च धनराशि व उपलब्धि का जिलेवार ब्यौरा मांगा है। आरटीआई कार्यकर्ता आशीष सागर दीक्षित ऩे बताया की बांदा को रिट आदेश में विशेष तौर पर इंगित किया गया है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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