
- विनोद मिश्रा
बांदा। हीरों की बात आते ही अब तक “दुनिया की नजर दक्षिण अफ्रीका और भारत में पन्ना पर टिकती” थी, लेकिन अब उत्तर प्रदेश के “बांदा जिले ने विश्व के हीरा मानचित्र” पर अपनी “दावेदारी ठोक” दी है। जिले की “बागे और रंज नदियों” में “हीरों की प्रबल” मौजूदगी ने “अंतरराष्ट्रीय भू-वैज्ञानिकों का ध्यान भी खींच” लिया है।
भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण के अनुसार “बांदा का भू-विज्ञान दुनिया” के “सबसे समृद्ध हीरा क्षेत्रों में गिने” जाने वाले “मध्य प्रदेश के पन्ना हीरा बेल्ट’ का ही “विस्तार’ है। विंध्य पर्वत श्रृंखला से घिरे इस क्षेत्र की किम्बरलाइट चट्टानें “हीरों की जननी” मानी जाती हैं। “यही चट्टानें पन्ना से होते हुए बांदा तक फैली” हैं।
ऐतिहासिक साक्ष्य भी इसकी “गवाही” देते हैं। कालिंजर के पास बहने वाली “बागे नदी के बेसिन” में पहले भी “हीरे” मिल चुके हैं। विश्व प्रसिद्ध रामखेरिया “हीरा बजरी खदान” भी “बागे नदी के किनारे ही स्थित” है। नदी का “बहाव पन्ना से बांदा” की ओर होने से “मानसून में हीरे जलोढ़ के रूप में बहकर बांदा की तलहटी में जमा” हो जाते हैं। उधर, अजयगढ़ घाटी में “रंज नदी” पर बने बांध के डूब क्षेत्र में “हीरों का अकूत भंडार दबा” होने की “संभावना जताई” जा रही है।
बांध की “गहरी खुदाई से निकली मिट्टी में हीरे मिलने की खबर से हजारों लोग तसला-छलनी” लेकर “नदियों में उतर” रहे हैं और कई “मजदूरों को कीमती हीरे मिल” भी चुके हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि “केंद्र और राज्य सरकार संयुक्त रूप से इस क्षेत्र का वैज्ञानिक सर्वेक्षण और व्यवस्थित खनन शुरू” करे तो “बांदा पन्ना के बाद देश का दूसरा सबसे बड़ा हीरा उत्पादक जिला बन” सकता है। यह न सिर्फ उत्तर प्रदेश की “अर्थव्यवस्था” बदलेगा, बल्कि “विश्व बाजार में भारतीय हीरों की चमक और तेज” कर देगा।
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