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October 9, 2026
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सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे 'चाणक्य' आलोक और 'रणनीतिकार' रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?
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सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे ‘चाणक्य’ आलोक और ‘रणनीतिकार’ रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

लखनऊ। समाजवादी पार्टी ने “राज्यसभा चुनाव “के लिए अपने “पत्ते” खोल दिए हैं और इस बार अखिलेश यादव ने “चौंकाने वाला नहीं, बल्कि बेहद सोचा-समझा दांव” खेला है।सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे 'चाणक्य' आलोक और 'रणनीतिकार' रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?सपा मुखिया के सबसे “करीबी और वरिष्ठ सलाहकार” बांदा के “डीएम” रह चुके पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन और पार्टी के प्रमुख रणनीतिकार प्रोफेसर रामगोपाल यादव को “राज्यसभा” भेजने का फैसला यूपी की राजनीति में “बड़े संकेत” दे रहा है। यह सिर्फ “दो उम्मीदवारों” की घोषणा नहीं, बल्कि 2027 के “विधानसभा चुनाव” से पहले अखिलेश यादव की “नई चुनावी रणनीति” का “ट्रेलर” है।सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे 'चाणक्य' आलोक और 'रणनीतिकार' रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?आलोक रंजन को “राज्यसभा” भेजना अखिलेश यादव का “सबसे बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक दांव” है। आलोक रंजन यूपी के “सबसे ताकतवर” मुख्य सचिवों में “गिने” जाते हैं। “नौकरशाही” में आज भी उनकी “गहरी पैठ” है। सपा सरकार आने पर “प्रशासन को कैसे साधना है, इसकी पूरी ब्लू-प्रिंट रंजन” के पास है।सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे 'चाणक्य' आलोक और 'रणनीतिकार' रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?इसके साथ ही सपा लगातार” ब्राह्मण वोट बैंक” में “सेंध” लगाने की कोशिश कर रही है। “एक कद्दावर, साफ छवि वाले ब्राह्मण चेहरे के रूप” में आलोक रंजन “पीडीए” के साथ-साथ “अगड़ी जातियों” को साधने का “तुरुप का पत्ता” साबित होंगे। इस फैसले के बाद यूपी में आलोक रंजन की “राजनीतिक हैसियत कई गुना बढ़” जाएगी। वह अब केवल सलाहकार नहीं, बल्कि पार्टी के “दिल्ली में सबसे बड़े चाणक्य” होंगे।सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे 'चाणक्य' आलोक और 'रणनीतिकार' रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?वहीं प्रोफेसर रामगोपाल यादव को “दोबारा राज्यसभा” भेजना यह बताता है कि अखिलेश यादव कोई “रिस्क” नहीं लेना चाहते। रामगोपाल यादव सपा के “संकटमोचक” हैं। वह पार्टी के अंदर परिवार को “एकजुट” रखने और दिल्ली की सियासत में सपा का “पक्ष मजबूती” से रखने के लिए जरूरी हैं। उनके “अनुभव” के बिना सपा की राज्यसभा की “रणनीति अधूरी” है।सपा का दांव: बांदा के डीएम रहे 'चाणक्य' आलोक और 'रणनीतिकार' रामगोपाल के सहारे बड़ा मास्टरस्ट्रोक ?विश्लेषकों की मानें तो यह दो नाम दो अलग-अलग मोर्चों के लिए हैं। रामगोपाल यादव पार्टी के “अंदरूनी किले को मजबूत” करेंगे, जबकि आलोक रंजन बाहर, प्रशासन, दिल्ली और सवर्ण वोट बैंक में सपा के लिए नए रास्ते खोलेंगे। यह “पीडीए” के साथ “प्रशासनिक अनुभव और सवर्ण समीकरण” को “जोड़ने का नया फॉर्मूला” है, जिससे सपा 2027 से पहले खुद को “सत्ता के लिए ज्यादा परिपक्व और प्रशासनिक रूप से तैयार” दिखाना चाहती है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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