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October 13, 2026
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जंग से फार्मा सेक्टर में हड़कंप: दवाओं के 'दाम' में लगी 'आग', अस्पताल खर्च हुआ 'महंगा' !
उत्तर प्रदेश

जंग से फार्मा सेक्टर में हड़कंप: दवाओं के ‘दाम’ में लगी ‘आग’, अस्पताल खर्च हुआ ‘महंगा’ !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। पश्चिम एशिया में “भड़की जंग” अब सिर्फ “सीमाओं तक सीमित नहीं” रही, बल्कि इसका “खतरनाक” असर “भारत की स्वास्थ्य व्यवस्था” पर भी पड़ने लगा है, जहां ईरान और इजराइल के बीच जारी संघर्ष ने “दवाओं और सर्जिकल सामान” की कीमतों में ऐसी ‘आग’ लगा दी है कि आम आदमी के लिए “इलाज कराना मुश्किल” होता जा रहा है। दवा बाजार से सामने आई चौंकाने वाली तस्वीर के मुताबिक, कच्चे माल की आपूर्ति ठप होने के कारण दवाओं और सर्जिकल उपकरणों के दामों में 10 से 20 प्रतिशत तक की जबरदस्त बढ़ोतरी हो चुकी है।

जंग से फार्मा सेक्टर में हड़कंप: दवाओं के 'दाम' में लगी 'आग', अस्पताल खर्च हुआ 'महंगा' !

आने वाले दिनों में यह आंकड़ा और ऊपर जा सकता है, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह महंगी होने के कगार पर हैं। असल में भारत का फार्मा सेक्टर आयातित कच्चे माल पर भारी निर्भर है,जो मुख्य रूप से अमेरिका,चीन और वियतनाम से आता है। अक्सर नेपाल के रास्ते देश में पहुंचता है, लेकिन मौजूदा युद्ध जैसे हालात ने इस पूरी सप्लाई चेन को हिला कर रख दिया है, जिसके चलते कच्चा माल या तो समय पर नहीं पहुंच रहा या फिर महंगे दामों पर मिल रहा है।

जंग से फार्मा सेक्टर में हड़कंप: दवाओं के 'दाम' में लगी 'आग', अस्पताल खर्च हुआ 'महंगा' !

इस संकट का सीधा असर उत्पादन पर पड़ा है,जहां कई दवा कंपनियों को मजबूरी में अपना उत्पादन घटाना पड़ रहा है, वहीं ट्रांसपोर्ट लागत, लॉजिस्टिक्स चार्ज और अन्य परिचालन खर्चों में भी तेज उछाल आया है, जिसने इस संकट को और विस्फोटक बना दिया है। सबसे बड़ा झटका आम लोगों को लग रहा है, क्योंकि रोजमर्रा में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाएं जैसे पैरासिटामोल, निमेसुलाइड और एंटीबायोटिक्स सिप्रोफ्लोक्सासिन व नॉरफ्लोक्सासिन की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं, जिससे मामूली बुखार और संक्रमण का इलाज भी अब जेब पर भारी पड़ने लगा है।

जंग से फार्मा सेक्टर में हड़कंप: दवाओं के 'दाम' में लगी 'आग', अस्पताल खर्च हुआ 'महंगा' !

सिर्फ दवाएं ही नहीं, अस्पतालों में इस्तेमाल होने वाले जरूरी सर्जिकल सामान जैसे कैनुला, आईवी फ्लूइड बोतलें, ग्लव्स, थर्मामीटर और एक्स-रे फिल्म भी महंगे हो गए हैं, जिससे इलाज की कुल लागत में भारी उछाल आ गया है। मरीजों के सामने दोहरी मार पड़ रही है। यह सिर्फ एक आर्थिक संकट नहीं, बल्कि एक उभरता हुआ ‘हेल्थ इमरजेंसी और भी भयावह रूप’ ले सकती है।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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