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October 13, 2026
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औद्योगिक विकास से 'चमका' बुंदेलखंड: जमीन बनी 'सोने' की खान, दामों में ऐतिहासिक उछाल
उत्तर प्रदेश

औद्योगिक विकास से ‘चमका’ बुंदेलखंड: जमीन बनी ‘सोने’ की खान, दामों में ऐतिहासिक उछाल

शरद मिश्रा सम्पादक सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • शरद मिश्रा

बांदा। जिस बांदा की मिट्टी को कभी सूखा,अभाव और पलायन की पहचान माना जाता था, वही “मिट्टी” आज “अनमोल” हो चुकी है। हालात ऐसे हैं कि अब “जमीन तलाशने” पर भी आसानी से “नहीं” मिल रही। कीमतें इतनी बढ़ चुकी हैं कि आम आदमी के लिए “जमीन खरीदना” सपना बनता जा रहा है। जमीन अब जरूरत नहीं, बल्कि “निवेश और मुनाफे” का सबसे “बड़ा जरिया” बन गई है।

औद्योगिक विकास से 'चमका' बुंदेलखंड: जमीन बनी 'सोने' की खान, दामों में ऐतिहासिक उछाल

बांदा की यह बदलती तस्वीर बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे की देन मानी जा रही है। एक्सप्रेसवे ने न सिर्फ सड़कें जोड़ीं, बल्कि संभावनाओं और पूंजी को भी इस क्षेत्र तक पहुंचा दिया। महोखर निवासी आशुतोष बताते हैं कि एक्सप्रेसवे निर्माण के दौरान उनके पिता की जमीन अधिग्रहित हुई, जिसके बदले उन्हें करीब दो करोड़ रुपये का मुआवजा मिला। दो भाइयों में बंटवारे के बाद मिली रकम से पहले एक छोटा मकान बनाया गया और अब शेष धन से प्लाटिंग का काम किया जा रहा है। आशुतोष कहते हैं, “जमीन के कारोबार में मुनाफा बहुत है, लेकिन अब जमीन मिलना ही सबसे बड़ी परेशानी बन गई है।”

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अब बांदा में जमीन केवल खेती के लिए नहीं खरीदी जा रही। लोग मानते हैं कि खेती करें या न करें,लेकिन जमीन खरीद ली तो भविष्य में मुनाफा तय है। यही वजह है कि खेत तेजी से प्लॉटों में तब्दील हो रहे हैं। बेंदा गांव के पूर्व प्रधान विवेक सिंह बताते हैं कि अब लोग “गिट्टी-मोरंग” जैसे पारंपरिक काम छोड़कर “जमीन के कारोबार में उतर” रहे हैं। उनका कहना है,“खेती हो या न हो,लेकिन जमीन की खरीद सबसे बड़ा निवेश बन चुकी है।” जहां पहले जमीन की कीमत “बीघा और बिस्वा” में तय होती थी, वहीं अब जमीन “स्क्वायर फीट” में बिक रही है। यह बदलाव न केवल जमीन के बाजार को दर्शाता है, बल्कि बांदा की आर्थिक सोच में आए बड़े परिवर्तन को भी दिखाता है।

बुंदेलखंड एक्सप्रेस वे अब नहीं झुलायेगा यात्रियों को झूला

बुंदेलखंड एक्सप्रेसवे के आसपास का इलाका अब तेजी से “व्यावसायिक हब” बनता जा रहा है। छोटी दुकानें अब बड़ी हो रही हैं, ढाबों की संख्या लगातार बढ़ रही है। मैगी प्वाइंट से लेकर गेस्ट हाउस तक खुल चुके हैं। मोबाइल शॉप और रिपेयरिंग की दुकानें तेजी से फैल रही हैं। यात्रियों और व्यापारियों की बढ़ती आवाजाही ने स्थानीय बाजार को नई ऊर्जा दी है। जमीन की बढ़ती कीमतों ने बांदा को निवेशकों की नजरों में खास बना दिया है। जो लोग पहले इस क्षेत्र को पिछड़ा मानते थे, अब वही यहां जमीन की तलाश में हैं।

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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