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October 13, 2026
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पीएम पोषण योजना में 'बड़ा घोटाला' : बच्चों का पौष्टिक भोजन 'जोखिम' में, प्रशासन ने आंखें मूंदीं !
उत्तर प्रदेश

पीएम पोषण योजना में ‘बड़ा घोटाला’ : बच्चों का पौष्टिक भोजन ‘जोखिम’ में, प्रशासन ने आंखें मूंदीं !

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। चित्रकूट मंडल में बच्चों के “स्वास्थ्य के साथ खुला खिलवाड़” हो रहा है और ‘जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठा’ है ! ‘प्रधानमंत्री पोषण योजना’ के तहत परोसे जा रहे मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता की जांच को लेकर जो सच सामने आया है, उसने पूरी व्यवस्था की “सड़ांध’ उजागर कर दी है ! हालात ऐसे हैं कि आठ महीने से बच्चों के भोजन का एक भी नमूना जांच के लिए नहीं भेजा गया, फिर भी कागजों में सब कुछ “संतोषजनक” चल रहा है।

पीएम पोषण योजना में 'बड़ा घोटाला' : बच्चों का पौष्टिक भोजन 'जोखिम' में, प्रशासन ने आंखें मूंदीं !

प्रदेश के 20 जिलों में लागू इस महत्वाकांक्षी योजना में चित्रकूट मंडल के चारों जिले बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा शामिल हैं। नियम साफ कहते हैं कि खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को समय-समय पर स्कूलों में बनने वाले भोजन और सामग्री के नमूने लेकर प्रयोगशाला में जांच करानी होगी। लेकिन जमीनी सच्चाई यह है कि अप्रैल से अब तक एक भी नमूना जांच के लिए नहीं गया। यानी बच्चों की थाली पर कोई “निगरानी” ही नहीं।

पीएम पोषण योजना में 'बड़ा घोटाला' : बच्चों का पौष्टिक भोजन 'जोखिम' में, प्रशासन ने आंखें मूंदीं !

यह खुलासा तब हुआ जब 27 नवंबर को चित्रकूट मंडल की समीक्षा बैठक हुई। इसके बाद डायरेक्टर जनरल ऑफ स्कूल एजुकेशन मोनिका रानी की 8 दिसंबर की कार्यवृत्त रिपोर्ट ने प्रशासन में खलबली मचा दी। रिपोर्ट में साफ-साफ दर्ज है कि चारों जिलों में एफडीए अधिकारियों ने एक भी नमूना नहीं लिया और न ही कोई निरीक्षण रिपोर्ट उपलब्ध कराई। यह महज लापरवाही नहीं, बल्कि सीधे-सीधे बच्चों के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है !

पीएम पोषण योजना में 'बड़ा घोटाला' : बच्चों का पौष्टिक भोजन 'जोखिम' में, प्रशासन ने आंखें मूंदीं !

जिम्मेदारी तय करने की बारी आई तो विभागों के बीच पत्राचार का खेल शुरू हो गया।  बांदा के बीएसए अभिव्यक्त राम समेत चित्रकूट, हमीरपुर और महोबा के बीएसए का दावा है कि एफडीए को कई बार नमूने लेने के लिए पत्र लिखे गए, लेकिन न जांच हुई, न रिपोर्ट आई। सवाल यह है कि जब महीनों तक कोई कार्रवाई नहीं हुई तो एफडीए पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया? डीजी स्कूल एजुकेशन ने इस गंभीर लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए बीएसए को जिलाधिकारियों को अवगत कराने के निर्देश जरूर दिए हैं, लेकिन प्रश्न है क्या सिर्फ निर्देशों से बच्चों की सेहत सुरक्षित हो जाएगी? क्या आठ महीने की चुप्पी के लिए किसी अधिकारी पर कार्रवाई होगी ?

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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