- विनोद मिश्रा
बांदा। ट्रांसपोर्ट नगर के लिये भूमि अधिग्रहण की नोटिस विकास प्राधिकरण के लिये बवाले जान बन सकती है! बीस वर्ष पुराने सर्वे के आधार पर विकास प्राधिकरण ने बिना स्थलीय निरीक्षण किए भूमि अधिग्रहण की नोटिसे कैसे और क्यों जारी कर दी , क्या इस संदर्भ में जमीनी हकीकत से आयुक्त दिनेश सिंह और जिलाधिकारी आनंद सिंह को अवगत कराया गया यह प्रश्न विचारणीय है।
दरसल विकास प्राध्किरण स्थापना के 40 वर्षों बाद बांदा शहर में ट्रक अड्डा/ट्रांसपोर्ट नगर स्थापना की सुध ले रहा है। प्राधिकरण ने शहर के सीमावर्ती आधा दर्जन गांवों की 208 हेक्टेयर से ज्यादा भूमि का अधिग्रहण करने की कवायद शुरू कर दी है। नोटिस जारी होते ही इन गांवों के सैकड़ों परिवारों में हलचल है।

प्राधिकरण ने अधिगृहीत भूमि के भू-स्वामियों पर सुधार शुल्क भी लगाया है। ग्रामीणों ने नोटिस,अधिग्रहण कार्रवाई का विरोध करते हुए वापस लेने की मांग की है। न्यायालय जाने की चेतावनी दी है। वर्ष 1981 में यहां स्थापित विकास प्राधिकरण शहर के सुुंदरीकरण में आज तक कोई खास भूमिका नहीं निभा सका। आवासीय योजनाएं भी विवादित रहीं। अब प्राधिकरण की एक नई कार्रवाई से सैकड़ों परिवार परेशान हो गए हैं।

प्राधिकरण ने शहर सीमा के नजदीक लड़ाका पुरवा का 70.825 हेक्टेयर, पल्हरी गांव की 50.989 हेक्टेयर, गुरेह गांव की 14.553 हेक्टेयर, महोखर की 21.89 हेक्टेयर, भवानीपुर की 24.377 हेक्टेयर और जमुनीपुर की 26.144 हेक्टेयर (कुल 208.678 हेक्टेयर) भूमि बस तथा ट्रक अड्डा/ट्रांसपोर्ट नगर के लिए अधिगृहीत करने की नोटिस जारी की है। नोटिस में कहा कि इस योजना में स्थित निर्माणों के भू स्वामियों पर बेटरमेंट फीस/विकास व्यय भी लगेगा। प्राधिकरण के सचिव और अधिशासी अभियंता द्वारा जारी नोटिस में कहा गया कि 30 दिन के अंदर इसमें आपत्तियां दी जा सकती हैं।

विकास प्राधिकरण की जमीन अधिग्रहण नोटिसों पर संबंधित गांवों के ग्रामीण एकजुट होकर विरोध पर आ गए हैं। आपत्ति में ग्रामीणों ने कहा कि ट्रांसपोर्ट नगर के लिए प्रस्तावित भूमि/क्षेत्र में अब घनी आबादी है। 90 फीसदी भाग में मकान व प्रतिष्ठान हैं। हजारों परिवार रह रहे हैं। कहा कि प्राधिकरण ने 20 वर्ष पुराने सर्वे के आधार पर यह प्रस्ताव किया है। अब यहां इसका औचित्य नहीं है। ग्रामीणों ने कहा कि अपनी खून पसीने की कमाई से उन्होंने जमीनों की रजिस्ट्री/बैनामा और निर्माण कराए हैं। ग्रामीणों ने प्राधिकरण से सवाल किया कि यहां ट्रांसपोर्ट नगर बनना था तो इस क्षेत्र को रजिस्ट्री प्रतिबंधित का नोटिफिकेशन क्यों नहीं किया गया। नो एंट्री क्षेत्र में ट्रांसपोर्ट नगर का औचित्य नहीं है। ग्रामीणों ने कहा है कि यहां से ट्रांसपोर्ट नगर का प्रस्ताव वापस नहीं लिया गया तो वह न्यायालय की शरण में जाएंगे।

ट्रांसपोर्ट नगर की स्थापना के लिये बांदा-महोबा रोड पर मटौंध तक, बांदा अतर्रा रोड,केन बाई पास पुल से सटी टीबाई पास रोडकरिया नारा हनुमान मंदिर के बीच काफी भूमि अधिग्रहीत की जा सकती थी पर पुराने सर्वे को आधार मान लिया गया। ऐसा क्यों और कैसे हुआ उम्मीद हैआयुक्त एवं डीएम विशेष ध्यान देगे।
( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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