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October 13, 2026
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सूखे का संकट या नीति का निकम्मापन: नहरें सूखी, बांध डेड स्टोर पर, किसान उठे 'कराह'
उत्तर प्रदेश

सूखे का संकट या नीति का निकम्मापन: नहरें सूखी, बांध डेड स्टोर पर, किसान उठे ‘कराह’

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। बुंदेलखंड के किसानों की एक और उम्मीद सूखे की तपिश में जलकर राख हो रही है। बांदा जिले में किसान पानी की भारी किल्लत के कारण धान की नर्सरी नहीं डाल पा रहे। सिंचाई विभाग ने साफ ऐलान कर दिया है नहरों में पानी देने की कोई संभावना नहीं, क्योंकि ‘बांध डेड स्टोरेज’ स्तर पर पहुंच चुके हैं।

सूखे का संकट या नीति का निकम्मापन: नहरें सूखी, बांध डेड स्टोर पर, किसान उठे 'कराह'

नहरें सूखी हैं,खेत प्यासे हैं और किसान मायूस। जिनके पास निजी नलकूप हैं, वो किसी तरह अपनी फसल की तैयारी में लगे हैं,ले किन जिन किसानों की आस सिर्फ नहरों से है, उनके सामने संकट पहाड़ बनकर खड़ा है। केन नहर प्रखंड के अधिशासी अभियंता अरविंद पांडे खुद मानते हैं कि “रनगवां, बरियारपुर और गंगऊ बांध डेड स्टोर” पर हैं। जब तक मानसून नहीं आता, तब तक पानी देना संभव नहीं है।

सूखे का संकट या नीति का निकम्मापन: नहरें सूखी, बांध डेड स्टोर पर, किसान उठे 'कराह'

जिले में स्थित रनगवां, बरियारपुर और गंगऊ बांध पूरी तरह डेड स्टोर पर चले गए हैं। इनमें इस कदर पानी की कमी है कि सिंचाई विभाग के अधिकारी अब साफ कह रहे हैं “बांध लबालब होंगे, तभी नहरों में पानी देंगे।” केन नहर प्रखंड के “अधिशासी अभियंता अरविंद पांडे” ने साफ किया कि विभाग मानसून का इंतजार कर रहा है। जब तक पर्याप्त बारिश नहीं होती और बांधों का जलस्तर नहीं बढ़ता, तब तक नहरें चालू नहीं की जा सकतीं।

सूखे का संकट या नीति का निकम्मापन: नहरें सूखी, बांध डेड स्टोर पर, किसान उठे 'कराह'

किसानों का कहना है कि प्रशासन को पहले से अनुमान था कि गर्मी अधिक पड़ेगी और जलस्तर घटेगा, फिर भी कोई वैकल्पिक तैयारी नहीं की गई। बुंदेलखंड जैसे अर्ध-शुष्क क्षेत्र में हर साल सूखे जैसे हालात बनते हैं, लेकिन सरकार और विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। विकास के बड़े-बड़े दावे करने वाली सरकार और योजनाएं इस बार किसानों की प्यास तक नहीं बुझा पा रही हैं ! किसानों का आरोप है कि बांधों का जल प्रबंधन भी दोषपूर्ण है ! जिन किसानों के पास निजी ट्यूबवेल और मोटर हैं, वे किसी तरह नर्सरी डाल पा रहे हैं, लेकिन जिनके पास संसाधन नहीं हैं, उनके खेतों में सूखा पसरा है।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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