- विनोद मिश्रा
बांदा । बुंदेलखंड के जिलों में इन दिनों मछली पालन का उद्योग तेजी से फल-फूल रहा है। तीन जिलों में डेढ़ सौ से अधिक केज में मछली पाली जा रही है। इससे एक कांटे वाली पंगेशियस मछली की लोगों के बीच मांग बढ़ी है।

बुंदेलखंड में मछली पालन का काम दिनोंदिन बढ़ रहा है। पहले तालाबों में मछली पालन होता रहा है। लेकिन अब बांधो में केज(पिंजरा) बनाकर यह काम किया जा रहा है। सात में से तीन जिलों में बांधो में केज पर मछली पल रही हैं। यूं तो केज से मछली पालन पिछले करीब पांच सालों से हो रहा है। लेकिन जब से बांधो में मछली पालन होने लगा तो उत्पादन व आमदनी में भी इजाफा हुआ है।

विभागीय जानकारी के मुताबिक एक साल में करीब साढ़े चार करोड़ की लागत की मछली पैदा हो रही है। साल 2013-14 में केज की शुरूआत झांसी के बढ़वार से हुई थी। उसमें 56 केज बनाकर मछली पाली गयी थी। दो साल पहले अब बांधो में मछली पाली जा रही है।

झांसी व चित्रकूटधाम मंडल के उपनिदेशक मत्स्य का कहना है कि बुंदेलखंड के तीन जनपदों में केज से मछली पालन हो रहा है इनमें बांदा के रनगवां बांध में 24, महोबा के अर्जुन बांध में 12, झांसी के कमलासागर में 40, बढ़वार में 56, ललितपुर के सजनवा व शहजाद में 12-12 केज पर मत्स्य पालन हो रहा है। इन सभी में पंगेशियस प्रजाति की मछली पाली जा रही है। एक केज में करीब 12 क्विंटल तक छह माह में मछली पैदा होती हैं। यह मछली सौ से सवा सौ प्रति किलो की दर से बिकती है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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