
- विनोद मिश्रा
बांदा। बुंदेलखंड को “हरा-भरा” करने का “सरकारी दावा” सबसे “बड़े घोटाले” में बदल चुका है। वन विभाग की कार्यशैली ने “कहावत चरितार्थ” कर दी है की “ज्यों-ज्यों दवा की मर्ज” बढ़ता ही गया। पौधरोपण के नाम पर “करोड़ों का बंदरबांट” हो रहा है और जिम्मेदार “पेट पर हाथ फेर” कर “मौज काट” रहे हैं। पिछले 19 साल का “हिसाब” देखिए तो “होश उड़” जाएंगे।
वर्ष 2005 से 2024 तक केंद्र और प्रदेश सरकार ने बुंदेलखंड के बांदा, चित्रकूट, महोबा, हमीरपुर, जालौन और झांसी में “हरियाली” के नाम पर लगभग “एक हजार करोड़ से ज्यादा, यानी एक अरब रुपये पानी की तरह बहा” दिए।
वन विभाग ने “फाइलों में 75 करोड़ पौधे” लगाने का “दावा” ठोक दिया। लेकिन सच्चाई क्या है ? वन विभाग के ही “आंकड़े उसके भ्रष्टाचार की पोल खोल” रहे हैं। राष्ट्रीय वन नीति कहती है कि कुल क्षेत्रफल का 33 फीसदी जंगल होना चाहिए, लेकिन “चित्रकूट को छोड़ दें तो बुंदेलखंड के किसी जिले में 5 से 6 फीसदी भी वन भूमि” नहीं बची है। पूरे बुंदेलखंड में औसतन सिर्फ 10 फीसदी वन भूमि है।
विचारणीय यह है की “अगर 75 करोड़ पौधे सच में लगे होते तो आज बुंदेलखंड बंजर क्यों दिखता” ? कहां गए वे पौधे ? किसने खाया “एक अरब का बजट” ? हकीकत यह है कि हर साल मानसून में “पौधरोपण का नाटक” होता है, “फोटो खिंचती है, फाइलों में पौधों की संख्या बढ़ा” दी जाती है और “बजट बंदरबांट” हो जाता है। “न पौधों को पानी दिया जाता है,न सुरक्षा”। एक साल बाद “उसी जगह फिर नया बजट, फिर नया पौधरोपण”। यह “हरियाली नहीं, भ्रष्टाचार की खेती है, जो वन विभाग सालों” से कर रहा है !
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_0000000055a072089a09490a85573f53-683x1024.png)
![Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh](https://citynewsuttarpradesh.in/wp-content/uploads/2026/05/file_00000000022872078732ec3f33441b29.png)
Notice: This report has been updated by City News Uttar Pradesh Desk, . Full responsibility for the content of this report rests with City News Uttar Pradesh Desk. Neither www.citynewsuttarpradesh.in nor the Editorial Board bears any responsibility.
