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October 13, 2026
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बिजली के लिए 'तरसती' 3 हजार ज़िंदगियां: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, हाईवे पर लगाया जाम
उत्तर प्रदेश

बिजली के लिए ‘तरसती’ 3 हजार ज़िंदगियां: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, हाईवे पर लगाया जाम

विनोद कुमार मिश्रा ( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )

  • विनोद मिश्रा

बांदा। “तीन महीने की तपती दोपहरी, अंधेरे में डूबा गांव और जिम्मेदारों की गूंगी चुप्पी !” आखिरकार साथी गांव के ग्रामीणों का सब्र जवाब दे गया। बिजली की कटौती और ट्रांसफार्मर की मरम्मत न होने से त्रस्त ग्रामीणों ने बुधवार को हाईवे पर लेटकर जाम लगा दिया। गाड़ियों की लंबी कतारें, चिलचिलाती धूप में तड़पते राहगीर और प्रशासन के माथे पर चिंता की लकीरें ये सब गवाही दे रहे थे कि “सिस्टम फेल हो चुका है !”

बिजली के लिए 'तरसती' 3 हजार ज़िंदगियां: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, हाईवे पर लगाया जाम

बांदा के तहसील क्षेत्र अंतर्गत साथी गांव की लगभग 3000 की आबादी बीते तीन माह से बिजली संकट झेल रही है। ट्रांसफार्मर फुंक चुका है, लेकिन न तो नया लगाया गया, न ही कोई सुनवाई हुई। बुधवार को ग्रामीणों का गुस्सा इस हद तक उबाल पर पहुंच गया कि वे पहले बिजली उपकेंद्र का घेराव करने पहुंचे और फिर सीधे मुख्य चौराहे पर हाईवे जाम कर दिया। सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक जाम की वजह से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। बुजुर्ग, महिलाएं, बच्चे सब लू की मार झेलते हुए अपनी आवाज़ को सरकार तक पहुंचाने की कोशिश करते रहे। वहीं, शासन-प्रशासन का पहला जवाब “ट्रांसफार्मर नहीं हैं !” ग्रामीणों का आरोप है कि जेई और लाइनमैन ट्रांसफार्मर बदलवाने के नाम पर ‘सुविधा शुल्क’ मांगते हैं।

बिजली के लिए 'तरसती' 3 हजार ज़िंदगियां: ग्रामीणों का फूटा गुस्सा, हाईवे पर लगाया जाम

प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे पीसी पटेल ने मंच से एलान किया “बिजली विभाग के अधिकारी और कर्मचारी रिश्वत की रोटियां सेंक रहे हैं, और जनता धूप में जल रही है। जब तक कार्रवाई नहीं होगी, सड़क नहीं खाली होगी।” तहसीलदार लखनलाल राजपूत, नायब तहसीलदार दीपेंद्र कुमार और एसडीओ एजाज रसूल पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। ग्रामीणों को मनाने में उन्हें तीन घंटे लगे। एसडीओ एजाज रसूल ने माना कि ट्रांसफार्मर की कमी है और जल्द बदलाव का आश्वासन दिया। बांदा का साथी गांव आज पूरे प्रदेश के ग्रामीण सिस्टम की तस्वीर बन चुका है। सरकारी योजनाओं के दावे सिर्फ प्रेस विज्ञप्तियों में हैं, ज़मीन पर आज भी जनता बिजली, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए आंदोलन कर रही है।

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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