- विनोद मिश्रा
बांदा। सूरज की किरणें चित्रकूट मण्डल को केवल गर्मी की तपन से बेहाल ही नहीं करती बल्कि निहाल भी कर रही हैं । पावर कारपोरेशन का चीर हरण बचा रहीं हैं। यहां दिन के अलावा सूरज रात को भी रोशन कर रहा है।

मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, चित्रकूट और महोबा को सूरज की किरणों से 370 मेगावाट का करंट हर माह मिल रहा है। प्रदेश के पावर कारपोरेशन को इसकी कीमत 36 करोड़ रुपये प्रतिमाह अदा करनी पड़ रही है।

पिछले लंबे अरसे से चित्रकूटधाम मंडल के चारों जिलों बांदा, हमीरपुर, महोबा और चित्रकूट में सब स्टेशन और बिजली का उत्पादन मांग के मुताबिक नहीं बढ़ सका । ऐसे में पावर कारपोरेशन को प्राइवेट क्षेत्र के सौर ऊर्जा प्लांटों पर निर्भर होना पड़ा ।
मंडल के चारों जिलों में कई कंपनियों के सौर ऊर्जा प्लांटों से बिजली आपूर्ति की जा रही है। सूरज की किरणों से पैदा हो रहा करंट सबसे ज्यादा महोबा जनपद में खप रहा है।

अधिशासी अभियंता ट्रांसमीसन रवि वर्मा कहते हैं की बिजली लिया जाना कारपोरेशन के लिए घाटे का सौदा नहीं है। सौर ऊर्जा प्लांटों से पर्यावरण को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इनमें न धूल है और न धुआं। इसलिए इन्हें ग्रीन एनर्जी प्लांट भी कहा जाता है। बुंदेलखंड में यूं भी पर्यावरण की समस्या पहले से है। पावर कारपोरेशन में सौर ऊर्जा प्लांट बंद हो जाते हैं। तब प्लांट को उनकी जरूरत के लिए पावर कारपोरेशन के सब स्टेशन से बिजली दी जाती है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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