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October 9, 2026
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स्वास्थ्य व्यवस्था की 'फूल' रहीं 'सांसें': अस्पताल हुआ बेदम, सामने आया चौंकाने वाला सच
उत्तर प्रदेशबुंदेलखंड

स्वास्थ्य व्यवस्था की ‘फूल’ रहीं ‘सांसें’: अस्पताल हुआ बेदम, सामने आया चौंकाने वाला सच

विनोद मिश्रा डायरेक्टर सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिला अस्पताल में “मरीजों की बढ़ती भीड़” के बीच “स्वास्थ्य सेवाओं” की तैयारियों की “गंभीर तस्वीर” सामने आई है। रोजाना 1500 से 1800 मरीज ओपीडी में पहुंच रहे हैं, जुकाम, खांसी और बुखार के मरीजों की लंबी कतारें लगी हैं, लेकिन स्वाइन फ्लू जैसी गंभीर बीमारी की जांच के लिए जिला अस्पताल में मशीन तक उपलब्ध नहीं है। अस्पताल में “आठ बेड” का “वार्ड” जरूर “आरक्षित” कर दिया गया है, मगर “बीमारी की पुष्टि करने वाली जांच व्यवस्था अब तक नदारद” है।स्वास्थ्य व्यवस्था की 'फूल' रहीं 'सांसें': अस्पताल हुआ बेदम, सामने आया चौंकाने वाला सचजिला अस्पताल में इन दिनों “जुकाम, खांसी और बुखार” के मरीज “बड़ी संख्या” में पहुंच रहे हैं। रोजाना ओपीडी 1500 से 1800 मरीजों तक पहुंच रही है। डॉक्टरों के कक्षों के बाहर लंबी कतारें हैं। ऐसे माहौल में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण वाले मरीजों की “समय पर जांच और पहचान बेहद जरूरी” हो जाती है। लेकिन अस्पताल प्रशासन के मुताबिक यहां स्वाइन फ्लू की जांच की सुविधा ही उपलब्ध नहीं है। जांच मशीन न होने के कारण अब तक “एक भी मरीज की जांच नहीं” हो सकी है।स्वास्थ्य व्यवस्था की 'फूल' रहीं 'सांसें': अस्पताल हुआ बेदम, सामने आया चौंकाने वाला सचस्वाइन फ्लू से निपटने के लिए जिला अस्पताल में “आठ बेड का वार्ड आरक्षित” किया गया है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि अब तक कोई संदिग्ध मरीज नहीं आया है। लेकिन जांच सुविधा नहीं होने के कारण बीमारी की पुष्टि के लिए अस्पताल की क्षमता सीमित बनी हुई है। जिला अस्पताल के “सीएमएस” ने भी स्वीकार किया कि “स्वाइन फ्लू जांच की सुविधा उपलब्ध नहीं” है। मशीन नहीं होने के कारण “जांच किट” भी नहीं मिली हैं।डायरिया 'डायन' कर रही है 'कथक नृत्य': अस्पतालों में अफरातफरी, मरीजों की भीड़ में दम तोड़ती व्यवस्थाअब विचारणीय है की यदि किसी “मरीज” में “स्वाइन फ्लू” जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसकी “जांच और पुष्टि” के लिए क्या व्यवस्था है ? क्या मरीज को दूसरी जगह भेजा जाएगा ? और “जांच में देरी होने पर उसकी निगरानी” कैसे होगी? अस्पताल में वार्ड आरक्षित करना जरूरी कदम है, लेकिन सिर्फ वार्ड तैयार होने से बीमारी से मुकाबले की पूरी व्यवस्था नहीं बनती। “जांच सुविधा, किट और समय” पर “पहचान” भी उतनी ही जरूरी है।

 
 



Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh
 





 

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