- विनोद मिश्रा
बांदा। पंचायत चुनाव को महज कुछ ही दिन शेष बचे हैं। पोलिंग पार्टियां यहां दो दिन ठहरेंगी। वह किसी प्रत्याशी व बाहर का भोजन भी स्वीकार नहीं करेंगी। ऐसे में परिषदीय विद्यालय की रसोई ही काम आती है। 1729 विद्यालयों में से महज 1555 में ही रसोई की व्यवस्था है। शेष 174 में खुले में भोजन बनाना मजबूरी होगी।

जिले में 1729 परिषदीय विद्यालयों हैं। जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उच्चाधिकारियों की बैठक में 5 अप्रैल को जो रिपोर्ट प्रस्तुत की वह चौकाने वाली ही है। विद्यालय स्थापना के वर्षों गुजर गए। लेकिन बेपरवाह अधिकारी व उदासीन जनप्रतिनिधियों ने इतना भी नहीं देखा कि 174 विद्यालयों में कई हजार की संख्या में छात्र-छात्राएं अध्ययनरत हैं। इनके मध्यान्ह भोजन की व्यवस्था के लिए रसोईघर का होना आवश्यक है। सबकुछ कागजों में इधर से उधर दौड़ता रहा। अब पंचायत चुनाव में यह1729 विद्यालय मतदान केंद्र बने हैं। 1555 में रसोई है। शेष 174 में रसोई घर का अभाव है। ऐसे में दो दिन पोलिग पार्टियों का यहां ठहराव है। इन्हें भी इन दोनों दिनों में खुले में धूल भरी आंधी, धूप के बीच बन रहे भोजन को स्वीकार करना पड़ेगा। एक ओर मैदान में मतदाताओं की लाइन दूसरी ओर इसी मैदान में खुले में पक रहा भोजन व्यवस्थाओं के मुकम्मल इंतजाम को मुंह चिढ़ाने वाला साबित होगा।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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