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October 12, 2026
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बांदा का लघु सिंचाई विभाग सीएम योगी के लिये चैलेंज: बना भ्रष्टाचार का महासागर !
उत्तर प्रदेश

बांदा का लघु सिंचाई विभाग सीएम योगी के लिये चैलेंज: बना भ्रष्टाचार का महासागर !

 

  • विनोद मिश्रा

बांदा। जिले का लघु सिंचाई विभाग भ्रष्टाचार की गहराइयों में डूबा हुआ है ! करोड़ों रुपए के घोटाले की बू पूरे जिले में फैल रही है।

बांदा का लघु सिंचाई विभाग सीएम योगी के लिये चैलेंज: बना भ्रष्टाचार का महासागर !

योगी सरकार के “भ्रष्टाचार मुक्त शासन” के नारे के बीच विभाग के ‘अधिकारी और ठेकेदार’ मिलकर ‘सरकारी खजाने’ को निजी जेबों में भरने का खेल खुलेआम खेल रहे हैं ? आश्चर्य है की विभागीय राज्य मंत्री रामकेश निषाद इसी जिले के हैं पर भ्रष्टाचारी फिर भी बेखौफ हैं ?

लघु सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार का नंगा नाच ! जल शक्ति राज्य मंत्री रामकेश ‘बोरिंग’ घोटाला पर सख्त !

पिछले दो वर्षों में जिले में तालाब, रपटों और नलकूपों के नाम पर भारी निर्माण कार्य कराए गए लेकिन सच्चाई यह है कि ज़्यादातर निर्माण सिर्फ “कागज़ों में” पूरे हुए हैं। ज़मीन पर हकीकत उजाड़ और धूल-धूसरित पड़ी है ! बड़ोखर खुर्द ब्लॉक में 5 तालाबों का निर्माण दिखाया गया, पर 2 तालाबों में पानी तक नहीं। ग्रामीणों ने बताया कि तालाब की मिट्टी में दरारें हैं गहराई अधूरी छोड़ी गई। जसपुरा ब्लॉक में 3 रपटों पर लाखों का खर्च दिखाया गया, लेकिन एक रपटा पहली बारिश में ही टूट गया। किसी ने जांच नहीं की !

लघु सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार की ललकार ? डीएम की खामोशी पर सवाल ?

महुवा ब्लॉक के 4 तालाबों में से 1 में पानी नहीं। कारण ? घटिया निर्माण और फर्जी मापपत्र। बिसंडा ब्लॉक में 6 तालाब बने, 2 में पानी नहीं। ग्रामीणों ने खुलकर कहा “यह तालाब नहीं, भ्रष्टाचार का गड्ढा है !” नरैनी ब्लॉक में बनी 5 रपटों में से 2 टूटी हुई हैं विभाग ने कभी निरीक्षण तक नहीं किया ! बबेरू ब्लॉक और कमासिन ब्लॉक में भी यही कहानी दोहराई गई। फर्जी रिपोर्टें, घटिया काम और अफसरों की आंखों पर भ्रष्टाचार की पट्टी? तिंदवारी ब्लॉक की 5 रपटों में से 2 पहली ही बरसात में बिखर गईं पर विभाग ने फिर भी ठेकेदारों को भुगतान कर दिया।

लघु सिंचाई विभाग में भ्रष्टाचार की ललकार ? डीएम की खामोशी पर सवाल ?

लघु सिंचाई विभाग का यह खुला भ्रष्टाचार अब मुख्यमंत्री योगी के “शून्य सहनशीलता” नीति के लिए चुनौती बन चुका है ? सूत्रों की मानें तो हर कार्य में औसतन 35 से 40 प्रतिशत कमीशन बंधा है ! यही कारण है कि बोरिंग में अनाप सनाप बिलिंग, घटिया सामग्री, आधे-अधूरे तालाब और टूटी रपटें भी पास करा दी जाती हैं। पर शासन, प्रशासन की खामोशी नें उनकी कर्तव्य निष्ठा को संदेह के दायरे में ला दिया है !

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

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