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October 14, 2026
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मरही माता देवी मंदिर का है अनोखा इतिहास : श्रद्धा का अद्भुत है यह केंद्र
उत्तर प्रदेश

मरही माता देवी मंदिर का है अनोखा इतिहास : श्रधा का अद्भुत है यह केंद्र

  • विनोद मिश्रा

बांदा। मुख्यालय स्थिति मरही माता मंदिर मनोकामना पूर्ण के लिये श्रधा का केंद्र है। इनका इतिहास भी पहले बहुचर्चित नहीं था लेकिन वर्तमान में इनकी आराधना शक्ति पीठ के रूप में होती है।वर्तमान में यह मंदिर भव्य रूप धारण कर चुका है ।जहां चैत्र व शारदीय नवरात्रि पर दर्शनार्थियों की भारी भीड़ उमड़ती है।

मरही माता देवी मंदिर का है अनोखा इतिहास : श्रद्धा का अद्भुत है यह केंद्र
Marhi Mata Devi Temple has a unique history: it is a wonderful center of reverence

शहर के नोनिया मोहाल में विराजमान मरही माता को चार दशक पहले कोई नहीं जानता था। मात्र मोहल्ले के ही लोग मिट्टी के चबूतरे मे बनी मड़ियां के बारे में जानते थे। 1977 में जब मध्य प्रदेश के जबलपुर निवासी गनेश प्रसाद तिवारी उर्फ बब्बा तिवारी का विवाह शहर के कटरा मोहल्ले में लक्ष्मी नारायण चतुर्वेदी की बेटी विनीता तिवारी के साथ हुआ। उस समय तक शहर के लोग मरही माता से अपरचित थे। शादी के 5-6 माह बाद जब श्री तिवारी बांदा आये और उन्होंने अपने आध्यात्मिक ज्ञान से मरही माता मंदिर जाने की बात कही तो रिश्तेदारों ने ऐसा कोई मंदिर होने से इंकार किया, लेकिन उनका कहना था कि मंदिर शहर में है।
रिश्तेदारों ने कई स्थानो पर पता किया पर मंदिर का पता नहीं चला। तब बब्बा तिवारी स्वयं संकरी गलियो से होते हुए नोनिया मोहल्ले में पहुंचे जहां मिट्टी के चबूतरे में विराजमान देवी प्रतिमा को मरही माता का प्राचीन स्थल बताया।

मरही माता देवी मंदिर का है अनोखा इतिहास : श्रद्धा का अद्भुत है यह केंद्र
Marhi Mata Devi Temple has a unique history: it is a wonderful center of reverence

बब्बा तिवारी ने जब वहां पूजा अर्चना शुरू की तो मोहल्ले के लोगों की आस्था बढ़ी। कहा जाता है कि तत्कालीन भूमि संरक्षण अधिकारी शैलेन्द्र सिंह वर्मा के कोई पुत्र नही था। उनकी सात पुत्रियां थी। उन्होंने बब्बा तिवारी से पुत्र प्राप्ति के लिए कोई उपाय करने को कहा तो उन्होंने मरही माता मंदिर में पूजा अर्चना का ज्ञान दिया। उन्हे पुत्र की प्राप्ति हुई। तभी उन्होंने मरही माता मंदिर का निर्माण कराया। यहां विराजमान देवी प्रतिमा सैकड़ों वर्ष पुरानी बताई जाती है।
मरही माता मन्दिर का इतिहास ज्यादा पुराना तो नहीं है परन्तु माता मरही की मूर्ति इस पेड़ के नीचे कितने वर्षों से है इसकी आज तक कोई सटीक जानकारी नहीं दे सका है। यहाँ रहने वाले वयोवृद्ध लोग बताते हैं कि उनके भी दादा-परदादा माता मरही की पूजा वर्षों से करते चले आ रहे हैं। यानि इतना तो कह ही सकते हैं कि माता की यह मूर्ति कम से कम सैकड़ों वर्ष पुरानी है।

 

 

 

 

Sharad Mishra [ Editor In Chief ] CITY NEWS Uttar Pradesh

 

 
 



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