- विनोद मिश्रा
बांदा। मानसून रूठ जानें से जिले में खनन माफियाओं की पौ बारह हो गई हैं। जिला प्रशासन ने मानसूनी सीजन के कारण सितंबर तक खनन पर प्रतिबंध लगा रखा है। लेकिन जिले की अधिकांश बालू खदानें केन नदी में गुलजार हैं।
सिर्फ उदाहरण स्वरूप खपटिहा खंड सौ बटे 103,अमलोर खंड सात, मरौली खंड दो एंव चार में माफिया चोरी -छिपे बिना ओटीपी के बालू की बिक्री खदानों से कर रहें हैं साथ ही अवैध भंडारण का खेल भी हो रहा हैं। जो डंप वैध हैं उनमें भी खेल है। जैसे पपरेदा के पास राघवेंद्र मिश्रा का डंप एंव गन्छा खदान से छंगा का खनन खेल सीएम योगी को “चैलेंजिंग” अंदाज में “मूंछ पर ताव” देकर चल रहा हैं ?

“राघवेंद्र” को अवैध बालू की कमाई “किर किरी” की बजाय “मिसरी” सी बन गई है ! और “गन्छा खदान” माफिया “छंगा” की तिजोरी को “चंगा” कर रही हैं। भगवान जानें बालू के अवैध खनन और भंडारण के खेल में प्रशासन की नजर टेढ़ी होनें की बजाय “मेहरबान” क्यों हैं ? राघवेंद्र पर ज्यादा “नजरें इनायत” हैं। इसके बारे में चर्चा है कि वह खनिज निदेशक रोशन जैकब को कथित तौर पर भ्रष्ट बताता है ? कहता हैं वह मेरी मुठ्ठी में हैं ? उसको “गरम” करते ही सब “नरम” हो जाता हैं ?

आपको बता दें कि इस सीजन में कानूनन खनन पूरी तरह से बंद है। फिर भी अवैध रूप से ट्रक एंव ट्रैक्टरों से नदी खदान से बालू लाकर कुछ दूरी पर डंप वाली जगह पर इकट्ठा किया जा रहा है। जबकि खनिज नियमावली के तहत खदान से दूरी कम से कम पांच किलोमीटर होना चाहिऐ। बाद में माफिया और उनके गुर्गे इस बालू को डंप का बताकर बेचते हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि बांदा में प्रशासन ने बालू के जो डंप दिए हैं उनमें भी ज्यादातर खदान संचालकों के डमी कंडिडेट को ही दिए गए हैं। ऐसे में खदान के पास भंडारण पर सख्ती न होना भी खुद प्रशासन की नियत पर भी सवाल उठा रहा है ?
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