- विनोद मिश्रा
बांदा।बुंदेलखंड में क्रशर उद्दोग कभी भी नियमों के दायरे में नहीं रहा। गाइड लाइनों के उलंघनके चलते हमेशा से काले सोना के रूप में माशहूर इस कारोबार पर पुलिस प्रशासन के अलावा प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की भी निगाहें टिकी रहती हैं। क्रशरों में धूल डस्ट से प्रदूषण नियंत्रण नियमों की अनदेखी होती हैं। नियंत्रण बोर्ड को अपनी साख बचाने के लिए अक्सर कार्रवाई करनी पड़ती है।
चालू वित्तीय वर्ष में चित्रकूटधाम मंडल में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 157 क्रशर सील किए हैं। साथ ही लगभग 13 करोड़ रुपये जुर्माना लगाया है। इनमें महोबा के 81 क्रशर भी शामिल हैं। यहां के क्रशर कारोबारियों पर करीबन पांच करोड़ जुर्माना लगाया गया है।
क्रशर कारोबारियों की अपनी दिक्कतें और मजबूरियां हैं। नियम-कानूनों पर पूरा अमल करने से कारोबार असम्भव सा हो जाएगा। पहाड़ तोड़ने के लिए किए जाने वाले धमाकों में कई गैर कानूनी काम करने पड़ते हैं। ओवरलोडिंग भी होती है। इन्हीं सब बातों का फायदा पुलिस एंव प्रशासन उठाती है।और उनकी पौ बारह यानी लाटरी खुल जाती है।
उधर, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अलग निगाहें गड़ाए रहता है। सेटिंग के बाद भी कार्रवाई करनी ही पड़ती है। चालू साल में चित्रकूटधाम मंडल के 157 क्रशर पर कार्रवाई करते हुए सील कर दिया गया है। ये करीब दो माह से सील हैं। इनके अलावा 71 क्रशरों को नोटिस भी जारी किया गया है।

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