- विनोद मिश्रा
बांदा। चौंकाने वाली खबर है की खाद किसानों के लिये “करवा चौथ का चाँद” बन गया है। बड़ी मशक्कत से दर्शन हो रहें है। सरकारी आकड़ों में खाद का स्टाक “गुलजार ” है।पर किसानों को दीदार के लिये कड़ी तपस्या करनी पड़ रही है।

रबी सीजन में दलहनी और तिलहनी फसलों की बुवाई शुरू हो गई है। ऐसे में किसानों में डीएपी खाद की डिमांड बढ़ी है। हर केंद्र पर सैकड़ों की संख्या में किसान उमड़ रहे हैं। जबकि एक केंद्र में एक दिन में 150-200 किसानों को टोकेन के जरिए खाद दी जा रही है। कृषि विभाग के मुताबिक जनपद में खाद की उपलब्धता लक्ष्य से कहीं ज्यादा है। खाद का कोई संकट नहीं है। वहीं केंद्रों में किसान खाद के लिए खून-पसीना बहा रहे हैं। चार-चार दिन से उन्हें एक-एक बोरी खाद के लिए लाइनों में लगना पड़ रहा है।

जनपद में रबी फसलों में 28 हजार यूरिया और 16 हजार मीट्रिक टन डीएपी खाद की जरूरत है। कृषि विभाग के मुताबिक अक्टूबर तक जनपद में 4128 मीट्रिक टन यूरिया और 3886 मीट्रिक टन डीएपी खाद की उपलब्धता होनी चाहिए। इसके सापेक्ष जनपद में 5190 एमटी यूरिया और 6342 मीट्रिक टन डीएवी खाद उपलब्ध है जो लक्ष्य से ज्यादा है। जबकि पिछले वर्ष अक्टूबर में विभाग के पास जिले में 6755 एमटी यूरिया और 10284 एमटी डीएपी खाद उपलब्ध रही है।

जिला कृषि अधिकारी डा.प्रमोद कुमार का दावा है कि जिले में खाद का पर्याप्त स्टाक है। किन्हीं कारणों से सेंटरों में खाद पहुंचने में कुछ देर हुई तो किसान हंगामा शुरू कर देते हैं। किसानों को उचित रेट पर ही खाद दी जा रही है।

( शरद मिश्रा- संपादक )
( सिटी न्यूज़ उत्तर प्रदेश )



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